क्या झारखंड में सुरक्षित नहीं फोन? मरांडी का सरकार पर हमला

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झारखंड की सत्ता के गलियारों में कथित तौर पर दो शीर्ष नौकरशाहों के बीच हुए फोन कॉल के ऑडियो रिकॉर्डिंग को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा. इस बीच झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए राज्य में आम नागरिकों से लेकर संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की निजता पर खतरे का सवाल खड़ा कर दिया है.

नेता प्रतिपक्ष ने कथित ऑडियो शेयर कर उठाए सवाल

बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक तीखा संदेश साझा करते हुए कहा कि उन्हें भी यह कथित ऑडियो प्राप्त हुआ है, हालांकि इसकी सत्यता जांच का विषय है. उन्होंने स्पष्ट किया कि असली सवाल यह नहीं है कि ऑडियो में किसने किससे क्या बात की. बल्कि यह है कि अगर सत्ता के शीर्ष पर बैठे अधिकारियों के फोन ही सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, नौकरशाही और आम नागरिकों की प्राइवेसी कैसे सुरक्षित मानी जा सकती है.

नेता प्रतिपक्ष ने सीधे तौर पर सीएम हेमंत सोरेन और झारखंड सीएमओ को टैग करते हुए सवाल किया है. उन्होंने लिखा है कि क्या राज्य की सुरक्षा और शासन व्यवस्था इसी तरह की कथित जासूसी के भरोसे चल रही है. नेता प्रतिपक्ष ने इसे ‘घटियागिरी और नीचता’ करार देते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री की नाक के नीचे इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं, तो प्रदेश की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है.

ऑडियो की जांच कर हो कार्रवाई: बाबूलाल मरांडी

बाबूलाल मरांडी ने अपनी पोस्ट के जरिए मांग की है कि इस पूरे मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए और कथित ऑडियो की निष्पक्ष जांच हो. साथ ही दोषी पाए जाने वालों को ऐसा कड़ा दंड दिया जाए कि भविष्य में कोई भी इस तरह की हरकत करने की सोच भी न सके. उन्होंने कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि राज्य के हर नागरिक की निजता और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है.

सोशल मीडिया में वायरल कथित ऑडियो को लेकर फिलहाल सरकार या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. लेकिन विपक्ष के तीखे तेवरों के बाद यह मुद्दा सियासी और प्रशासनिक हलकों में और तूल पकड़ता नजर आ रहा है.

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