जामताड़ा जिले के नाला प्रखंड में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी से जुड़ी महिलाओं ने पर्यावरण-अनुकूल होली के रंग बनाने में कमर कस ली है। प्रखंड के जेएसएलपीएस कार्यालय में दीदियों ने पलाश फूलों और अन्य प्राकृतिक सामग्री से करीब 5 क्विंटल अबीर-गुलाल तैयार किया है।
महिलाओं ने बताया कि पलाश के फूलों को सुखाकर छानने के बाद कपूर से सुगंध और फूड कलर से चमक दी जाती है। यह गुलाल बाजार में मिलने वाले केमिकल रंगों के सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प के रूप में उपलब्ध होगा।
अब तक जामताड़ा के नाला, कुंडहित, फतेहपुर, कर्माटांड़ और नारायणपुर सहित छह प्रखंडों में 50-50 किलो गुलाल वितरित किया जा चुका है। वहीं, दुमका, देवघर और धनबाद जैसे जिलों से भी ऑर्डर मिल रहे हैं।
महिलाओं ने उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना अतिरिक्त आय का माध्यम बन गई है और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है।
बीपीएम गणेश महतो ने कहा कि हरा, बैंगनी, पीला, लाल, नारंगी और पिंक जैसे रंग पूरी तरह प्राकृतिक हैं और किसी भी प्रकार के केमिकल का उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि ये रंग त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं और बाजार के हानिकारक रंगों की तुलना में स्थायी चमक भी प्रदान करते हैं।
गणेश महतो ने कहा कि जेएसएलपीएस की इस सफलता पर गर्व है और जिला स्तर पर महिलाओं को ऋण सुविधा बढ़ाकर स्वावलंबी बनाने की कोशिश जारी है। उन्होंने बताया कि पिछले साल राज्य स्तर पर महिला समूहों को उनके अच्छे काम के लिए सम्मानित किया गया था और इस बार भी नाला प्रखंड का नाम रोशन करने की उम्मीद है।
होली नजदीक होने के साथ ही महिलाएं दिन-रात उत्पादन में जुटी हैं। यह पहल न केवल महिलाओं की आय बढ़ा रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
जामताड़ा से संतोष कुमार की रिपोर्ट










