झारखंड के नगर निकाय चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पिछड़ा वर्ग आयोग ने ट्रिपल टेस्ट की फाइनल रिपोर्ट शुक्रवार को नगर विकास विभाग को सौंप दी। इसकी पुष्टि आयोग के सदस्य नंदकिशोर मेहता ने की।
साथ ही राज्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर अलका तिवारी की नियुक्ति भी की गई। इन दोनों घटनाओं के साथ ही पिछले ढाई साल से लंबित निकाय चुनाव से जुड़ी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं पूरी हो गई हैं। इससे राज्य में नगर निकाय चुनाव कराने का रास्ता लगभग साफ हो गया है और चुनाव की तैयारी तेज हो गई है।
नगर विकास विभाग के अनुसार, राज्य सरकार दिसंबर या जनवरी तक निकाय चुनाव करा सकती है। हालांकि, इसकी कुछ प्रक्रिया अभी बाकी है। रिपोर्ट पर कार्मिक, विधि एवं वित्त विभाग की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। उसके बाद विभागों से स्वीकृति लेकर इसे कैबिनेट में पास कराया जाएगा।
इसके बाद रिपोर्ट को राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपा जाएगा। आयोग द्वारा निर्धारित आरक्षण और मतदाता सूची जारी करने के बाद ही चुनाव की प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी। अनुमान है कि यह प्रक्रिया नवंबर के मध्य तक पूरी हो जाएगी।
राज्य सरकार के पास निकाय चुनाव कराने की अंतिम डेडलाइन मार्च 2026 है। यदि तय समय तक चुनाव नहीं होते हैं, तो 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर झारखंड को केंद्र से तीन वित्तीय वर्ष का अनुदान नहीं मिलेगा।
16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने 30 मई को रांची दौरे के दौरान कहा था कि इस साल चुनाव कराने पर केंद्र से रोकी गई राशि जारी होगी। यह अनुदान तीन वित्त वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए होगा। चुनाव नहीं होने से केंद्र के पास झारखंड का 2023-24 और 2024-25 के लिए क्रमशः 713 करोड़ रुपए बकाया है। पिछले तीन वर्षों का कुल नुकसान लगभग 2000 करोड़ रुपए है।
इस प्रकार, ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट और राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के बाद निकाय चुनाव की प्रक्रिया में तेजी आई है और दिसंबर–जनवरी तक चुनाव कराने की संभावना मजबूत हो गई है।










