रांची के बरियातू स्थित डीआईजी मैदान के पास बनी कैलाश कोठी को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। झारखंड हाईकोर्ट ने कैलाश कोठी के ध्वस्तीकरण के खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने याचिका में कोई ठोस आधार नहीं पाते हुए इसे निरस्त कर दिया, जिससे अब इस भवन को हटाने का रास्ता साफ हो गया है।
कोर्ट ने याचिका में नहीं पाया दम
यह मामला मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति एस एस प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। याचिकाकर्ता खुशबू सिंह ने कैलाश कोठी को अवैध अतिक्रमण बताते हुए जारी नोटिस को चुनौती दी थी। अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद कहा कि याचिका में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया, जिसके आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाई जा सके।
जमीन अधिग्रहण और दस्तावेजों की हुई जांच
पूर्व की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रांची उपायुक्त को निर्देश दिया था कि वह प्लाट नंबर 1694, मौजा मोरहाबादी स्थित 33 डिसमिल जमीन से संबंधित गजट अधिसूचना प्रस्तुत करें। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया था कि उक्त भूमि का अधिग्रहण राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान के लिए हुआ है या नहीं और यदि हुआ है तो मुआवजे का भुगतान किया गया या नहीं। इसके बाद रांची डीसी और बड़गाईं अंचलाधिकारी की ओर से मूल दस्तावेज अदालत में पेश किए गए।
नोटिस और स्वामित्व दावे पर कोर्ट का रुख
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि कैलाश कोठी को अवैध अतिक्रमण बताते हुए नोटिस चिपकाया गया है, जबकि जिस जमीन पर यह भवन बना है, उसका अधिग्रहण नहीं हुआ। साथ ही स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज भी कोर्ट में प्रस्तुत किए गए। हालांकि, अदालत ने सभी तथ्यों और रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद याचिका को खारिज कर दिया और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को वैध ठहराया।










