JPSC घोटाले में CID का शिकंजा: ACF-FRO की कॉपियां बाहर लिखवाने वाले 6-9 एक्सपर्ट रडार पर

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JPSC नियुक्ति घोटाले की जांच में जुटी सीआइडी नये सिरे से मामले की जांच में जुटी है. जांच एजेंसी को अब आरोपी एक्सपर्ट शिक्षकों, प्रोफेसरों और साल्वरों की तलाश है. उन्हें TDPL निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी और सानंद प्रकाश के इशारे पर हरियाणा, लखनऊ, पंजाब और दिल्ली से रांची तथा हजारीबाग बुलाया गया था.

उनसे जेपीएससी की ACF और FRO की परीक्षा की कॉपियां परीक्षा के बाद जेपीएससी दफ्तर के स्ट्रांग रूम से निकाल कर लिखवायी गयी थीं, ताकि कमजोर अभ्यर्थी भी सफल हो सकें. CID को गिरफ्तार हुए कई लोगों ने बाहरी एक्सपर्ट को झारखंड में बुलाकर कॉपी लिखाने की बात बतायी है. इसके बाद फिर कई अभ्यर्थियों से भी पूछताछ हुई.

दिल्ली और लखनऊ में भी CID की चल रही छापेमारी
अब सीआइडी इन एक्सपर्ट्स की तलाश में दिल्ली और लखनऊ में भी जाकर छापेमारी कर रही है. सीआइडी की पूछताछ में अब तक करीब छह से नौ ऐसे लोगों के नाम सामने आये हैं, जिनकी भूमिका इस पूरे खेल में संदिग्ध बतायी जा रही है. सीआइडी के अधिकारियों का कहना है कि बयानों में आये नामों का सत्यापन किया जा रहा है, जिससे कि उनकी सही पहचान और वर्तमान ठिकाने का पता लगाया जा सके. सत्यापन पूरा होते ही उन्हें आरोपी बनाकर गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू की जायेगी. एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि इन एक्सपर्ट्स को हर अभ्यर्थी के एवज में कितनी रकम दी जाती थी.

नहीं आने वाले सवालों के जवाब एक्सपर्ट से लिखवाने का आरोप
बताया जा रहा है कि जिन अभ्यर्थियों को जवाब नहीं आते थे, उनकी उत्तर पुस्तिका स्ट्रांग रूम से बाहर निकाल कर एक्सपर्ट तक पहुंचायी जाती थीं. वहां एक्सपर्ट टीम मॉडल आंसर के आधार पर जवाब लिखती थी. इसके बाद कॉपी को दोबारा स्ट्रॉन्ग रूम में जमा करया जाता था. यह पूरी प्रक्रिया अभय तिवारी और सानंद प्रकाश की देखरेख में संचालित होने का आरोप है.

किस आरोपी ने क्या कहा ?
प्रदीप का बयान : आरोपी प्रदीप ने अपने क्यान में बताया है कि ACF और FRO की मुख्य परीक्षा की करीब 30 छात्रों की उत्तर पुस्तिका उसने जेपीएससी के स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर निकाली थी. इन कॉपियों को उसने रामवीर को सौंपा था. बाहर उत्तर पुस्तिका को लिखवाकर वापस JPSC में जमा कराया गया था.

संजय का बयान : आरोपी संजय ने अभय और रामवीर के बयान का आगे समर्थन करते हुए बताया है कि एफआरओ मेस में करीव 25 और एसीएफ मेस में करीब 15 यानी कुल करीब 40 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिका पीडीएफ एडिटर के जरिये परिवर्तित कर पास करायी गयी थी.

अभय का बयान : मुख्य आरोपी अभय तिवारी के बयान से यह तथ्य भी सामने आया है कि जिन अभ्यर्थियों को जवाब नहीं आता था, उनकी कॉपी को स्ट्रॉन्ग रूम से निकाल कर बाहर ले जाया जाता था और मॉडल उत्तर उपलब्ध करा जवाब लिखवाये जाते थे. जिन अभ्यर्थियों ने खुद ठीक उत्तर लिखे थे, उनके नंबर बढ़ाने के लिए प्रोफेसरों से संपर्क किया जाता था.

उस्मान का बयान : आरोपी उस्मान ने अपने बयान में बताया है कि करीब 100 छात्रों को अनुचित माध्यम से एफआरओ और एसीएफ परीक्षा पास करायी गयी थी. इसकी जानकारी उसने सीआइडी को दी है.

रामवीर का बयान : प्रदीप के बयान का समर्थन करते हुए रामवीर ने बताया है कि एफआरओ परीक्षा के दौरान अभय तिवारी, धर्मेंद्र और आनंद ने करीब 15 अभ्यर्थियों का रोल नंबर उसे दिया था. प्रति कैंडिडेट 8 से 10 लाख रुपये देने की बात तय हुई थी. रामवीर के मुताविक धर्मेंद्र के जरिये दिये गये 10-12 अभ्यर्थियों का काम पूरा हुआ, जबकि अभय तिवारी के करीब 50 अभ्यर्थियों का. इसके एवज में अभय तिवारी ने उसे 1.20 करोड़ रुपये नकद दिये थे. रामवीर ने यह भी बताया कि मुख्य परीक्षा के पेपर हजारीबाग और रांची में बाहर लिखे गये थे. इसके अलावा उसने यह भी खुलासा किया कि खाली छूटी OMR सीट को भरने के लिए लखनऊ और दिल्ली से टीम को बुलाया गया था.

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