जामताड़ा से एक अहम और सकारात्मक पहल की खबर सामने आई है, जहां जिले के दो युवा अधिवक्ताओं ने रेलवे स्टेशन पर बांग्ला भाषा को उसका पूर्व सम्मान दिलाने के लिए कदम उठाया है। जामताड़ा रेलवे स्टेशन के नाम बोर्ड और अनाउंसमेंट में बांग्ला भाषा को फिर से शामिल किए जाने की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने रेलवे प्रशासन से औपचारिक रूप से गुहार लगाई है।
दरअसल, जामताड़ा रेलवे स्टेशन के नाम बोर्ड पर पहले हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू के साथ-साथ बांग्ला भाषा में भी स्टेशन का नाम अंकित था। लेकिन बाद में बांग्ला भाषा को नाम बोर्ड से हटा दिया गया, जिससे स्थानीय बांग्ला भाषी लोगों में नाराजगी देखी जा रही थी।
इस मुद्दे को लेकर जामताड़ा के युवा अधिवक्ता राजेन सेन और वेद प्रकाश मंडल ने आसनसोल के अधिवक्ता उदय वाद्यकर और आकाश सोनकर के साथ मिलकर डीआरएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि पूर्व की तरह स्टेशन के नाम बोर्ड में बांग्ला भाषा को फिर से शामिल किया जाए, साथ ही बांग्ला भाषा में रेल अनाउंसमेंट की व्यवस्था भी की जाए, क्योंकि जामताड़ा जिला बांग्ला भाषी बहुल क्षेत्र है।
ज्ञापन सौंपने के बाद अधिवक्ताओं ने बताया कि डीआरएम कार्यालय में उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक बातचीत हुई है। रेलवे अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि आवश्यक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद इन दोनों मांगों को लागू किया जाएगा।
जिला वासियों के लिए यह पहल एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आई है, जहां दो युवा अधिवक्ताओं ने स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान दिलाने के लिए पहल की है। कुल मिलाकर, जामताड़ा के इन युवा अधिवक्ताओं की यह कोशिश केवल एक मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता को सम्मान दिलाने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है.
जामताड़ा से संतोष कुमार की रिपोर्ट










