ACB ने शुरुआती जांच में 38 करोड़ रुपये के घोटाले का केस दर्ज किया था. यह गड़बड़ी मैनपावर सप्लाई कंपनियों द्वारा फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर ठेका लेकर सरकारी राजस्व जमा नहीं करने से जुड़ी थी. आगे की जांच में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से शराब बिक्री के अनुपात में राजस्व कम जमा करने, प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर शराब बेचने और अन्य अनियमितताओं के कारण 70 करोड़ का अतिरिक्त नुकसान सामने आया. अब महुआ प्लेन ब्रांड की घटिया शराब की आपूर्ति और संबंधित प्रक्रियाओं की गड़बड़ी से कुल नुकसान 136 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
टेंडर से पहले ही दे दिया गया शराब आपूर्ति का काम
एसीबी ने कोर्ट को बताया कि नवीन केडिया की कंपनी को शराब आपूर्ति का काम आधिकारिक टेंडर जारी होने से पहले ही दे दिया गया था. नियमों के अनुसार JSBCL के साथ एग्रीमेंट किए बिना किसी कंपनी को शराब आपूर्ति की अनुमति नहीं दी जा सकती. लेकिन इस मामले में नियमानुसार प्रक्रिया पूरी किए बिना कंपनी को काम सौंप दिया गया था. जांच में यह भी पता चला कि कई चरणों में कागजी प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई और सरकारी नियमों को दरकिनार किया गया.
अमीत कुमार से दूसरी बार पूछताछ
मंगलवार को एसीबी ने तत्कालीन उत्पाद आयुक्त और वर्तमान वाणिज्य कर आयुक्त अमीत कुमार से पूछताछ की. यह उनसे दूसरी पूछताछ थी. शुक्रवार को भी उनसे सवाल किए गए थे. अधिकारियों के अनुसार, कुछ जानकारी उन्होंने दी है, जिसे दस्तावेजों से मिलाया जा रहा है. कई बिंदुओं पर स्पष्ट उत्तर नहीं मिलने के कारण उन्हें बुधवार को फिर बुलाया गया है. अमीत कुमार ने यह भी कहा कि शराब घोटाले का समय उनके कार्यकाल के बाद का है, इसलिए प्रक्रिया की पूरी जानकारी उनके पास उपलब्ध नहीं है.










