सुप्रीम कोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के जंतर-मंतर पर धरने के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया. सर्वोच्च न्यायालय में इसे लेकर याचिका दाखिल कर तुरंत सुनवाई की मांग की गई थी. न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए कहा, ‘हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है; हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है.’ बुधवार (जुलाई, 22, 2026) को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने एक वकील ने यह याचिका पेश की और कोर्ट से इस मामले पर खुद संज्ञान लेने का आग्रह किया. हालांकि, कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया.
‘हमारा समय बर्बाद न करें’
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने वकील से कहा, ‘हमारा समय बर्बाद न करें और अपना समय भी बर्बाद न करें.’ वकील ने दलील दी कि छात्र जनहित के मुद्दों पर विरोध कर रहे थे, जिनमें NEET-UG 2026 का पेपर लीक, परीक्षा का आयोजन और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार जैसे मुद्दे शामिल थे.
‘हम नहीं देखना चाहते वीडियो’
वकील की बात काटते हुए चीफ जस्टिस ने कहा, ‘बहुत-बहुत धन्यवाद.’ जब वकील ने फिर से ‘पुलिस की क्रूरता’ दिखाने वाले वीडियो का जिक्र किया तो CJI ने सख्ती से कहा, ‘हमारे पास समय नहीं है. हम वीडियो नहीं देखना चाहते.’ वकील के दोबारा छात्रों की पिटाई की बात कहने और वीडियो का हवाला देने पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘हमारा समय बर्बाद मत कीजिए. हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते.
क्यों प्रदर्शन कर रहे छात्र?
यह याचिका सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से संबंधित है. उस दिन हजारों छात्र और युवा प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए मध्य दिल्ली में एकत्र हुए थे. प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी. संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे.
NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP, उसके समर्थक और कई छात्र एक महीने से राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर डेरा डाले हुए हैं. एक्टिविस्ट और शिक्षाविद सोनम वांगचुक 28 जून को उनके साथ शामिल हुए और उनकी मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी. हालांकि, 18 जुलाई को पुलिस ने वांगचुक को जबरदस्ती विरोध स्थल से हटा दिया और सफदरजंग सरकारी अस्पताल ले गई. इसके बाद 21 जुलाई को उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया.










