रांची: भा.कृ.अनु.प.-भारतीय कृषि जैवप्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएबी), रांची और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) के बीच 11/33 केवी विद्युत उपकेंद्र (पावर सब-स्टेशन) की स्थापना को लेकर महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता जेबीवीएनएल कार्यालय, डोरंडा में संपन्न हुआ।
समझौते के तहत आईआईएबी अपने परिसर में उपकेंद्र निर्माण के लिए भूमि का एक हिस्सा जेबीवीएनएल को पट्टे पर उपलब्ध कराएगा। इस पहल को क्षेत्र की विद्युत अवसंरचना को मजबूत करने और निर्बाध एवं विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एमओए पर आईआईएबी के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित और जेबीवीएनएल, रांची के महाप्रबंधक मनमोहन कुमार ने दोनों संस्थानों के अधिकारियों की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए।
अनुसंधान गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा
प्रस्तावित विद्युत उपकेंद्र से आईआईएबी की अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को नई गति मिलेगी। इससे संस्थान की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक उपकरणों और विभिन्न शोध सुविधाओं के संचालन के लिए स्थिर एवं निर्बाध बिजली उपलब्ध हो सकेगी। बेहतर विद्युत व्यवस्था से वर्तमान और भविष्य की अनुसंधान परियोजनाओं की गुणवत्ता एवं दक्षता में भी सुधार होगा।
आसपास के गांवों को भी होगा लाभ
यह विद्युत उपकेंद्र केवल संस्थान की जरूरतों को ही पूरा नहीं करेगा, बल्कि आसपास के गांवों में भी बिजली वितरण और प्रबंधन को बेहतर बनाने में सहायक होगा। इससे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इस अवसर पर डॉ. सुजय रक्षित ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए विश्वसनीय विद्युत अवसंरचना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सहयोग संस्थान की शोध क्षमताओं को और मजबूत करेगा।
वहीं, जेबीवीएनएल के अधिकारियों ने कहा कि यह परियोजना संस्थान के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी लाभकारी साबित होगी और बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाएगी।
दोनों संस्थानों के बीच यह साझेदारी अनुसंधान अवसंरचना को सशक्त बनाने और क्षेत्रीय विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।










