रांची में विकसित स्वदेशी तकनीक को मिली पहचान, वेट मिलिंग उपकरण का डिजाइन पेटेंट दर्ज

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रांची, 25 अगस्त 2026: कृषि जैव प्रौद्योगिकी और नैनो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रांची स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB) ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने संस्थान द्वारा विकसित ‘वेट मिलिंग उपकरण’ (Wet Milling Apparatus) के डिजाइन को पंजीकृत किया है। यह उपकरण नैनो आकार की सामग्रियों को पाउडर के रूप में संश्लेषित करने के लिए विकसित किया गया है।

इस डिजाइन को डिजाइन संख्या 462517-001 के तहत 17 जून 2025 को पंजीकृत किया गया। डिजाइन पंजीकरण को मशीन के प्रोटोटाइप की नवीनता और अभिनव डिजाइन की मान्यता के तौर पर देखा जा रहा है।

तीन संस्थानों के सहयोग से विकसित तकनीक

यह पायलट-स्केल वेट मिलिंग प्रणाली ICAR-IIAB के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बिप्लब सरकार के नेतृत्व में विकसित की गई है। परियोजना में ICAR-केंद्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान (ICAR-CRIJAF), कोलकाता और ICAR-राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान (ICAR-NISA), रांची ने सहयोग किया।

25 लीटर क्षमता, नैनोकणों के उत्पादन में सक्षम

वेट मिलिंग उपकरण की प्रसंस्करण क्षमता 25 लीटर है। इसे स्टेनलेस स्टील बेस के साथ तैयार किया गया है। इसमें 75 से 100 RPM की गति से संचालित होने वाला इम्पेलर और सिरेमिक बॉल-बेयरिंग तंत्र लगाया गया है।

संस्थान के अनुसार, उच्च शक्ति वाली यांत्रिक मिलिंग प्रक्रिया के जरिए यह उपकरण धातु, धातु ऑक्साइड और जैव-व्युत्पन्न नैनोकणों के उत्पादन में सक्षम है। सुखाने की प्रक्रिया के बाद इन नैनोकणों को ठोस पाउडर के रूप में प्राप्त किया जा सकता है।

नैनो उर्वरक और नैनो कीटनाशक में संभावित उपयोग

इस कम लागत वाली मिलिंग प्रणाली का इस्तेमाल रासायनिक और हरित, दोनों तरह की प्रक्रियाओं से नैनोकणों के संश्लेषण में किया जा सकता है। इसके संभावित कृषि उपयोगों में नैनो उर्वरक, नैनो खनिज और नैनो कीटनाशक जैसे उत्पाद शामिल हैं।

संस्थान का कहना है कि यह तकनीक नैनो प्रौद्योगिकी आधारित कृषि अनुसंधान और टिकाऊ कृषि आदानों के विकास के लिए उपयोगी मंच साबित हो सकती है।

निदेशक ने अनुसंधान टीम को दी बधाई

ICAR-IIAB, रांची के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने इस उपलब्धि के लिए पूरी अनुसंधान टीम को बधाई दी। उन्होंने कृषि अनुसंधान और उत्पादन में संभावित उपयोग वाली कम लागत की अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने के लिए टीम के प्रयासों की सराहना की।

वहीं, इस नवाचार के प्रमुख विकासकर्ता डॉ. बिप्लब सरकार ने कहा कि कम लागत वाली ठोस नैनो-विनिर्माण प्रणाली नैनो उर्वरकों और अन्य नैनो आधारित कृषि उत्पादों के विकास को अधिक सरल और सुलभ बनाने में मदद कर सकती है।

उद्योग और कृषि उद्यमियों को सहयोग का न्योता

ICAR-IIAB की प्रौद्योगिकी प्रबंधन इकाई (ITMU) ने इच्छुक संगठनों, उद्योगों और कृषि उद्यमियों को इस पंजीकृत वेट मिलिंग मशीन प्रोटोटाइप के संबंध में सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और इसके व्यापक अनुप्रयोग की संभावनाओं पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया है।

संस्थान के मुताबिक, यह उपलब्धि उसके बौद्धिक संपदा पोर्टफोलियो को मजबूत करने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में स्वदेशी, कम लागत और अनुप्रयोग-आधारित तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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