कहां फंसे हैं झारखंड के 18 हजार करोड़? वित्त मंत्री ने विभागों से मांगी रिपोर्ट

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झारखंड राज्य के विभिन्न विभागों में पिछले 10 वर्षों से विकास योजनाओं के 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक पीएल अकाउंट में पड़े हैं. विभागों की ओर से प्रस्ताव आ रहा है कि पिछले 10 वर्षों से पीएल अकाउंट में रखी राशि की निकासी की अनुमति दी जाये. लंबे समय से निष्क्रिय पड़े इन खातों से खर्च की अनुमति मिले. इधर, वित्त मंत्री ने विभागों के इस प्रस्ताव को वित्तीय अनुशासन के विपरीत माना है. वित्त मंत्री ने विभागीय सचिवों को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि एक अप्रैल 2023 से पहले पीएल अकाउंट में जमा राशि विभाग राजकोष में लौटायें.

वित्त मंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के अतिरिक्त केवल पिछले तीन वित्तीय वर्षों, यानी कुल चार वर्षों की राशि ही पीएल अकाउंट में रखी जा सकेगी. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने एक महीने के भीतर विभागीय सचिवों को दूसरी बार पत्र लिखा है. इससे पहले 19 जून को उन्होंने इस संबंध में पत्र भेजकर पीएल अकाउंट में जमा राशि राजकोष में लौटाने का निर्देश दिया था. दूसरी बार 10 जुलाई को फिर पत्र लिखकर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि वित्त विभाग पीएल अकाउंट को लेकर गंभीर है. सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को गति देना चाहती है. वित्त विभाग के हस्तक्षेप के बाद विभागों ने तीन हजार करोड़ रुपये राजकोष में जमा भी कराये हैं.

क्या है पीएल अकाउंट, कैसे जमा हो गये करोड़ों रुपये
विभाग विभिन्न योजनाओं की राशि निर्धारित समय सीमा या चालू वित्तीय वर्ष में खर्च नहीं कर पाते हैं, तो उसे सरेंडर करने के बजाय अपने पीएल अकाउंट में जमा करा देते हैं. सरकार द्वारा निर्धारित बैंकों में विभागीय खातों में यह राशि जमा रहती है. यह पैसा वर्षों तक पड़ा रहता है. कई योजनाएं वर्षों तक चलती हैं, ऐसे में योजनाओं की बची हुई राशि विभाग अपने पीएल अकाउंट में रख लेते हैं. पूर्व वित्त सचिव अमित खरे ने इस संबंध में विभागों के लिए एक गाइडलाइन तय की थी. इसमें विभागों को पीएल अकाउंट में दो वर्ष से अधिक राशि रखने की अनुमति नहीं देने की बात कही गयी थी. पीएल अकाउंट की राशि वित्त विभाग लॉक कर देता है. वित्त विभाग की अनुमति के बाद ही यह राशि खर्च की जा सकती है.

किस विभाग के पीएल अकाउंट में कितनी राशि पड़ी है (करोड़ रुपये में)
विभाग राशि
ऊर्जा विभाग 3943.39
शहरी विकास एवं आवास 2876.94
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग 1957.60
कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग 1922.09
सड़क निर्माण विभाग 1853.67
कल्याण विभाग 1229.08
अन्य विभाग 3342.01

कुल 18901.74

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