उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने मंगलवार सुबह अंबेडकरनगर में एक लाख रुपये के इनामी बदमाश आसिफ अली को मुठभेड़ में मार गिराया. पुलिस के मुताबिक, एनकाउंटर सुबह करीब चार बजे जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर जगदीशपुर गांव के पास हुआ. आसिफ पर जौनपुर डबल मर्डर समेत कई संगीन मामलों में मुकदमे दर्ज थे.
STF पर की फायरिंग, जवाबी कार्रवाई में मारा गया
एसटीएफ के अनुसार, सूचना मिली थी कि आसिफ अली अंबेडकरनगर में छिपा हुआ है और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में है. सूचना के आधार पर टीम ने इलाके की घेराबंदी की. खुद को घिरता देख वह बाइक से भागने लगा और पुलिस पर फायरिंग कर दी. मुठभेड़ के दौरान एक सिपाही के दाहिने हाथ में गोली लगी, इसके बाद एसटीएफ ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आसिफ के सीने में दो गोलियां लगीं. घायल हालत में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. मौके से पुलिस ने एक पिस्टल, 12 बोर का तमंचा और एक बाइक बरामद की है.
जौनपुर डबल मर्डर में था वांटेड
नोएडा एसटीएफ यूनिट के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा ने बताया कि आसिफ अली जौनपुर में हुई डकैती और दो महिलाओं की हत्या के मामले में वांटेड था. इस वारदात में तीन अन्य लोगों पर भी जानलेवा हमला किया गया था, लेकिन उनकी जान बच गई थी. इसी मामले में जौनपुर पुलिस ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था. पुलिस के अनुसार, आसिफ के खिलाफ उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में हत्या, डकैती और लूट समेत करीब 20 आपराधिक मामले दर्ज थे.
पति-पत्नी समेत छह हत्याओं का आरोपी
पुलिस का कहना है कि आसिफ कुख्यात छैमार गैंग का सरगना था. उस पर पति-पत्नी समेत छह लोगों की हत्या के आरोप थे. गिरोह का तरीका लगभग हर वारदात में एक जैसा रहता था. बदमाश रात के समय कच्छा-बनियान पहनकर घरों में घुसते, परिवार को बंधक बनाकर लूटपाट करते और विरोध करने पर हत्या कर फरार हो जाते थे. वारदात के बाद आरोपी अपना नाम और ठिकाना बदलकर दूसरे जिले या राज्य में छिप जाते थे.
कई जिलों में वारदातों को दिया था अंजाम
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आसिफ और उसके गिरोह ने अलग-अलग जिलों में कई बड़ी डकैतियों और हत्याओं को अंजाम दिया था. 19 अक्टूबर 2013 को सुल्तानपुर में डकैती के दौरान एक व्यक्ति की हत्या करने का आरोप है. 2014 में जौनपुर के शाहगंज में डकैती के दौरान दो महिलाओं की हत्या और परिवार के अन्य सदस्यों पर हमला करने का भी आरोप है. 15 अगस्त 2015 को कौशांबी में पति-पत्नी की हत्या के बाद डकैती करने का आरोप है. 19 अगस्त 2015 को मुजफ्फरनगर में एक ही रात कई घरों में डकैती और महिलाओं पर हमला किया. 13 जनवरी 2021 को कानपुर देहात के रसूलाबाद में एक व्यक्ति की हत्या करने का मामला है.
क्या है छैमार गैंग?
पुलिस के अनुसार, छैमार गैंग उत्तर प्रदेश का कुख्यात आपराधिक गिरोह है, जो उत्तर प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों में भी सक्रिय रहा है. गिरोह के सदस्य दिन में इलाके की रेकी करते हैं और रात में डकैती की वारदात को अंजाम देते हैं. वारदात के बाद वे तुरंत अपना ठिकाना बदल लेते हैं, जिससे पुलिस के लिए उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है. गिरोह की कार्यप्रणाली कच्छा-बनियान और बावरिया गैंग जैसी मानी जाती है. पुलिस के मुताबिक, गिरोह में वही व्यक्ति सरगना बनता है, जिसने कई गंभीर अपराध किए हों. गिरोह के सदस्य डकैती से पहले कथित तौर पर पूजा-अर्चना करते हैं और फिर वारदात को अंजाम देते हैं. विरोध करने वालों पर धारदार हथियारों से हमला करना इस गैंग की पहचान रही है










