रांची में 38 करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है. इस मामले में कारोबारी विनय सिंह की जमानत रद्द कराने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने न्यायालय में याचिका दाखिल की है. ब्यूरो ने अपनी याचिका में कहा है कि विनय सिंह ने केस से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की और उन्हें नष्ट करने की कोशिश की, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
इस घोटाले में पहले भी विनय सिंह के खिलाफ कोर्ट से वारंट जारी हुआ था, लेकिन उस दौरान एसीबी उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी. बाद में उन्होंने अदालत से जमानत हासिल कर ली थी. इसी बीच जांच के दौरान एसीबी को सूचना मिली कि विनय सिंह केस से जुड़े कई अहम डिजिटल साक्ष्यों को डिलीट कर रहे हैं. सूचना की पुष्टि के बाद एसीबी की टीम ने उनके घर, नेक्सजेन शोरूम और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की थी।
छापेमारी के दौरान टीम ने 198 फाइलें, 27 सीपीयू, एक लैपटॉप, जमीन से जुड़ी चार रजिस्ट्री और दो मोबाइल फोन जब्त किये. डिजिटल उपकरणों को आगे की जांच के लिए एफएसएल भेजा गया था. एफएसएल रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि छापेमारी से पहले ही कई डिजिटल साक्ष्यों को डिलीट करने की कोशिश की गई थी. रिपोर्ट में डेटा इरेज़ के कई प्रयासों की पुष्टि बताई गई है, जिसे एसीबी ने जमानत रद्द करने के लिए आधार बनाया है।
एसीबी का यह कदम शराब घोटाले की जांच को नए चरण में ले जा सकता है. अगर अदालत जमानत रद्द करने की अनुमति देती है, तो विनय सिंह की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ जाएगी. मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है और ब्यूरो का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद कई और अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।










