बड़ा पुलिस फेलियर – हथकड़ी व रस्सी में जकड़ा आरोपी भी नहीं रोक सके

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जिला पुलिस की गंभीर चूक एक बार फिर चर्चा में है। मंगलवार को चंद्रपुरा रेलवे स्टेशन के पास एक बड़ा मामला सामने आया, जहां धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार एक आरोपी पुलिस हिरासत से भाग निकला। यह घटना उस समय हुई जब पुलिस टीम उसे हिमाचल प्रदेश के ऊना से जमशेदपुर ला रही थी।

फरार आरोपी की पहचान सुरेश एंड्रयू जेम्स के रूप में हुई है, जो मूल रूप से कर्नाटक के बेंगलुरु का निवासी है और लंबे समय से ओडिशा के मयूरभंज में रह रहा था। आरोपी पर ईसाई संस्थाओं से बड़े स्तर पर धोखाधड़ी करने का आरोप है। परसुडीह थाना प्रभारी अविनाश कुमार के अनुसार आरोपी के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला दर्ज है और कई राज्यों में उसके तार जुड़े होने की आशंका है।

चंद्रपुरा रेलवे पुलिस थाना प्रभारी एस. राम के अनुसार पुलिस टीम आरोपी को लेकर ट्रेन से जमशेदपुर जा रही थी। जब ट्रेन चंद्रपुरा के निकट तेलोन स्टेशन के पास पहुंची, तभी आरोपी ने बाथरूम जाने की अनुमति मांगी। पुलिस ने बताया कि आरोपी हथकड़ी और रस्सी से बंधा हुआ था। एक पुलिस अधिकारी उसके साथ बाथरूम की ओर गया।

इसी दौरान जेम्स ने अचानक पुलिसकर्मी को धक्का दिया। मौके का फायदा उठाते हुए वह चलती ट्रेन से कूद गया। धक्का देने के बाद आरोपी सेकंडों में नीचे कूदकर जंगलनुमा क्षेत्र में गायब हो गया। घटना इतनी अचानक हुई कि पुलिसकर्मी कोई प्रतिरोध भी नहीं कर पाए।

घटना के बाद बोकारो पुलिस सहित कई टीमों ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। रेलवे ट्रैक के आसपास के इलाकों, जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में छापेमारी चल रही है। हालांकि अब तक आरोपी का कोई पता नहीं चल सका है। पुलिस अधिकारी इस मामले में सुरक्षा चूक को स्वीकार कर रहे हैं। हिमाचल पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए ऐसे महत्वपूर्ण आरोपी को ट्रेन से लाने के दौरान बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए यात्रा कराना पुलिस की लापरवाही को साफ दर्शाता है।

सुरेश एंड्रयू जेम्स पर आरोप है कि वह ईसाई संगठनों और संस्थाओं से धन उगाही, फर्जी योजनाओं और दस्तावेजों के माध्यम से ठगी करता था। जांच में पता चला है कि आरोपी कई राज्यों में सक्रिय था और उसके नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। परसुडीह थाना प्रभारी के अनुसार आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जमशेदपुर में पेश किया जाना था, लेकिन फरार होने से पूरी प्रक्रिया बाधित हो गई है।

घटना के बाद आमलोग और स्थानीय संगठनों ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं— हथकड़ी लगे आरोपी को बिना अतिरिक्त सुरक्षा कैसे चलने दिया गया? हाई-प्रोफाइल धोखाधड़ी मामले में आरोपी को केवल एक अधिकारी की देखरेख में मूत्रालय ले जाना क्या सुरक्षित था? चलती ट्रेन के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं किया गया? अब पूरे मामले की आंतरिक जांच की जा रही है, जबकि फरार आरोपी की तलाश के लिए विभिन्न जिलों की पुलिस को अलर्ट कर दिया गया है।

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