राज्य में सामने आए करोड़ों रुपये के Jharkhand Liquor Scam की जांच के तहत मंगलवार को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने आईएएस अधिकारी कर्ण सत्यार्थी का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराया। ACB Investigation के दौरान दर्ज इस बयान में शराब नीति और उससे जुड़े फैसलों को लेकर कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
अपने बयान में कर्ण सत्यार्थी ने बताया कि होलसेल नीति के तहत शराब की आपूर्ति करने वाली कंपनियों को लाभ पहुंचाने का काम किया गया था। उन्होंने कहा कि जब वे उत्पाद आयुक्त के पद पर कार्यरत थे, उसी दौरान यह मामला उनके संज्ञान में आया था। इसके बाद उन्होंने इस संबंध में केस दर्ज करने का निर्देश दिया था।
कर्ण सत्यार्थी के अनुसार उनके इस निर्देश का तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे ने विरोध किया था। उन्होंने एसीबी को बताया कि विनय चौबे की नीतियों से जहां शराब कारोबारियों को आर्थिक लाभ मिला, वहीं राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा।
एसीबी सूत्रों के अनुसार बयान में शराब घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई है। जांच एजेंसी इस बयान को आगे की जांच में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल कर सकती है, जिससे ACB Investigation को गति मिलने के साथ-साथ जांच का दायरा भी बढ़ने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि कर्ण सत्यार्थी पूर्व में उत्पाद आयुक्त के पद पर पदस्थापित रह चुके हैं और वर्तमान में वे जमशेदपुर के उपायुक्त हैं। बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में सीलबंद कर दिया गया।










