Bihar Cyber Crime: सरकारी योजना का झांसा देकर खाता खुलवाना, निवेश के नाम पर लाखों-करोड़ों की ठगी समेत कई तरह के साइबर फ्रॉड से जुड़े मामले सामने आए. कई बार साइबर ठगों तक पुलिस पहुंच जाती है. लेकिन कई बार उनके कनेक्शन तक पुलिस नहीं पहुंच पाती है. लेकिन बिहार पुलिस कई नई तकनीकों के जरिए साइबर ठगों तक पहुंचने को कोशिश में जुटी है.
पिछले 6 महीनों में साइबर ठगी के मामले
सबसे पहले पिछले 6 महीने में साइबर ठगी के कितने मामले सामने आए और, कितनों की गिरफ्तारी हुई और पुलिस ने रिकवरी कितनी की है, उस पर नजर डालते हैं-
मार्च
कुल केस: 132
रिफंड: 5 लाख 70 हजार 853 रुपये
गिरफ्तारी: 7
अप्रैल
कुल केस: 168
रिफंड: 19 लाख 70 हजार 503 रुपये
गिरफ्तारी: 6
मई
कुल केस: 179
रिफंड: 19 लाख 84 हजार 112 रुपये
गिरफ्तारी: 5
जून
कुल केस: 181
रिफंड: 9 लाख 54 हजार 857 रुपये
गिरफ्तारी: 7
जुलाई
कुल केस: 118
रिफंड: 30 लाख 14 हजार 285 रुपये
गिरफ्तारी: 18
अगस्त
कुल केस: 110
रिफंड: 7 लाख 90 हजार 48 रुपये
गिरफ्तारी: 22
2024 से 2026 में बढ़ते साइबर क्राइम के मामले
बिहार में साइबर ठगी से जुड़े मामले बढ़ते ही जा रहे हैं. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट की माने तो, 2024 में साइबर क्राइम से जुड़े मामलों की संख्या 68,931 थी. साल 2025 में यह बढ़कर 1,17,812 हो गई. इसके बाद साल 2026 में यह आंकड़ा और बढ़ा और 1,14,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए. साइबर मामलों को लेकर बिहार के हॉटस्पॉट जिलों में पटना, नवादा, नालंदा और शेखपुरा शामिल है.
SHO संगीता ने दी ये जानकारी
बिहार पुलिस इन साइबर मामलों से कैसे निपटती है, ठगों तक कैसे पहुंचती और लोगों की मदद कैसे करती है, इसे लेकर डिटेल में जानकारी पटना के साइबर थाना की एसएचओ संगीता कुमारी ने दी. शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में ठगी के मामले बढ़ने पर उन्होंने कहा, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर ग्रामीणों से बैंक खाते खुलवाने और बाद में उन खातों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड में किया जाता है.
उन्होंने बताया कि एक गांव से सामने आए एक मामले की जांच में इसी तरह का खुलासा हुआ. एक महिला अलग-अलग सरकारी योजनाओं का नाम लेकर ग्रामीणों को खाते खुलवाने के लिए प्रेरित करती थी. कभी शौचालय निर्माण तो कभी अनाज उपलब्ध कराने के नाम पर लोगों से खाते खुलवाए गए. जांच में सामने आया कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए किया जा रहा था.
निवेश के नाम पर ठगी का नया तरीका
साइबर पुलिस के अनुसार हाल के दिनों में इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के मामले अधिक सामने आ रहे हैं. लोगों को निवेश करने पर कुछ ही समय में कई गुना रिटर्न देने का लालच दिया जाता है. शुरुआत में कम राशि निवेश कराकर लोगों का भरोसा जीता जाता है. इसके बाद अधिक रिटर्न का लालच देकर लगातार पैसे निवेश कराए जाते हैं. कई बार पीड़ित को जब ठगी का एहसास होता है, तब तक वह शुरुआती निवेश की तुलना में कई गुना अधिक रकम लगा चुका होता है.
फर्जी सिम से ज्यादा बैंक खातों को फॉलो करती है पुलिस
साइबर पुलिस के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जाने वाले सिम अक्सर फर्जी दस्तावेजों पर लिए जाते हैं. ऐसे में पुलिस आरोपित तक पहुंचने के लिए बैंक खातों और पैसों के ट्रांजेक्शन को फॉलो करती है. अधिकारी के मुताबिक, जांच में सबसे पहले पीड़ित को राहत दिलाने की कोशिश की जाती है. जिस रकम को रोका या वापस कराया जा सकता है, उसके लिए तत्काल कार्रवाई की जाती है.
लालच से बचना ही साइबर ठगी से बचाव का आसान तरीका
साइबर पुलिस ने लोगों को किसी भी आकर्षक ऑफर पर तुरंत भरोसा नहीं करने की सलाह दी है. अधिकारी के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति कहता है कि दो हजार रुपये निवेश करने पर दस हजार रुपये मिलेंगे, तो लोगों को पहले यह सोचना चाहिए कि कोई व्यक्ति दो हजार के बदले दस हजार क्यों देगा. किसी भी ऑफर को स्वीकार करने से पहले कुछ देर रुककर उसकी वास्तविकता जांचने से साइबर ठगी से बचा जा सकता है.
सोशल मीडिया पर फोटो के गलत इस्तेमाल से भी रहें सावधान
साइबर अपराध केवल पैसों की ठगी तक सीमित नहीं है. सोशल मीडिया पर लोगों की तस्वीरों का गलत इस्तेमाल किए जाने के मामले भी सामने आते हैं. पुलिस के मुताबिक, कई बार लोग अनजान लोगों को अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल, फोटो या अन्य जानकारी तक पहुंच दे देते हैं. इसलिए किसी अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट या फॉलो रिक्वेस्ट स्वीकार करने से पहले यह जांचना जरूरी है कि वह व्यक्ति वास्तविक है या फर्जी आईडी का इस्तेमाल कर रहा है.
हर महीने 100 से 150 साइबर फ्रॉड की FIR
साइबर पुलिस अधिकारी के अनुसार साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. हर महीने करीब 100 से 150 साइबर अपराध से जुड़ी एफआईआर दर्ज की जा रही हैं. लेकिन साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिस को नई तकनीक और संसाधन भी मिल रहे हैं, जिससे मामलों की जांच और पीड़ितों को राहत दिलाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है.










