पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया में अधिकारी सस्पेंड, कार्रवाई जारी

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चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में सात अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है. साथ ही मुख्य सचिव को उनके खिलाफ ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रोसेस के संबंध में गंभीर कदाचार, ड्यूटी में लापरवाही और कानूनी शक्तियों के गलत इस्तेमाल’ के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है.

निलंबित किए गए अधिकारियों में शामिल हैं- 1. डॉ सेफौर रहमान जो कृषि विभाग के सहायक निदेशक और 56-समसेरगंज विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ), 2. नीतीश दास, राजस्व अधिकारी, फरक्का तथा एईआरओ, 55-फरक्का विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, 3. दलिया रे चौधरी, महिला विकास अधिकारी, मयनागुड़ी विकास खंड तथा एईआरओ, 16-मयनागुड़ी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, 4. एसके मुर्शिद आलम, एडीए, सुती ब्लॉक और एईआरओ 57-सुती विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए, 5. सत्यजीत दास, जॉइंट ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) 6. जॉयदीप कुंडू, एफईओ दोनों 139-कैनिंग पुरबो विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ और 7. देबाशीष विश्वास, संयुक्त बीडीओ और एईआरओ 229-डेबरा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं.

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर ने मंगलवार को राज्य में चल रहे एसआईआर प्रक्रिया के लिए एक बदले हुए कार्यक्रम की घोषणा की. अपने बयान में सीईओ ने कहा कि नोटिस की सुनवाई 14 फरवरी तक पूरी हो जाएगी. डॉक्यूमेंट्स का रिव्यू और क्लेम का डिस्पोजल 21 फरवरी तक पूरा हो जाएगा.

बयान में यह भी कहा गया है कि पोलिंग स्टेशनों को रैशनलाइज करने का काम 25 फरवरी तक पूरा हो जाएगा. हेल्थ पैरामीटर चेक 27 फरवरी तक किए जाएंगे. अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को जारी किया जाएगा.

इस बदलाव की घोषणा सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद की गई, जिसमें पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग (ECI) के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) एक्सरसाइज के तहत फाइनल इलेक्टोरल रोल पब्लिश करने के लिए एक हफ्ते का एक्सटेंशन देने का आदेश दिया गया था.

कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) को रिवीजन प्रोसेस के दौरान हिंसा और इलेक्शन रिकॉर्ड जलाने के आरोपों पर कारण बताओ नोटिस भी जारी किया. अंतिम मतदाता सूची जो पहले 14 फरवरी को पब्लिश होने वाला था, अब बढ़ाई गई टाइमलाइन के बाद जारी किया जाएगा.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि यह एक्सटेंशन जरूरी था क्योंकि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) और असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (AEROs) को डॉक्यूमेंट्स की जांच करने और सही फैसले लेने के लिए और समय चाहिए था.

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