झारखंड विधानसभा का सफल बजट सत्र, विकास के नए रास्ते तय

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झारखंड विधानसभा का बजट सत्र कई मायनों में अहम रहा. विपक्ष की उदासीनता के बीच 18 फरवरी से शुरू हुआ सदन की कार्यवाही बुधवार 18 मार्च तक चला. इस बजट सत्र में कुल 242 अल्पसूचित प्रश्न स्वीकृत किए गए. जिनमें से 62 प्रश्नों के उत्तर सदन में दिए गए. इसी प्रकार कुल 758 तारांकित प्रश्न पूछे गए, जिनमें से 57 प्रश्नों का उत्तर सदन में दिए गए.

वहीं, ध्यानाकर्षण सूचनाओं की बात करें तो कुल 72 ध्यानाकर्षण सूचनाएं ली गई. जिनमें से 55 का उत्तर सदन में दिया गया. इस सत्र के दौरान कुल 96 निवेदन प्राप्त हुए और शून्यकाल की सूचनाएं कुल 400 स्वीकृत हुई. स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने समापन भाषण में सदन को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंकड़े इस बात की साक्षी है कि माननीय सदस्यगण राज्य की जनसमस्याओं के प्रति कितने सजग और उत्तरदायी हैं.

करीब 74 घंटे चला यह बजट सत्र

सत्र के दौरान सदन की कार्यक्षमता भी अच्छा रहा. जहां इस सत्र के लिए कुल 66 घंटे का समय निर्धारित किया गया था. वहीं सदन ने कुल पौने 74 घंटे काम किया, जो निर्धारित कार्य का लगभग 112 प्रतिशत है. यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है. इस सत्र में दो महत्वपूर्ण वित्तीय विधेयक पारित किए गए. वित्तीय वर्ष 2025-26 का तृतीय अनुपूरक बजट और वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट. जिसकी कुल राशि 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपए हैं.

झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक-2026 हुआ पारित

इसके अलावा बजट सत्र के दौरान झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक-2026 को भी सदन द्वारा पारित किया गया. यह विधेयक झारखंड राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को एक समान ढांचे में लाकर उनकी कार्य प्रणाली को बेहतर, पारदर्शी और प्रभावी बनाने का प्रयास करता है. इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना, शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करना, छात्रों को बेहतर सुविधाएं और समान अवसर प्रदान करना है. स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने समापन मौके पर कहा कि विधायी कार्यों की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि यह सदन केवल चर्चा का मंच नहीं, बल्कि निर्णय और विकास का केंद्र है.

सत्र में NEVA पोर्टल का सफल उपयोग

इस सत्र की एक विशेष उपलब्धि यह भी रही कि इसमें NEVA (ई-विधान) प्रणाली का आंशिक रूप से सफल उपयोग किया गया. सभी माननीय सदस्यों ने अपने शून्यकाल की सूचनाएं घर बैठे ही NEVA पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत की. जिससे उन्हें पूर्व की भांति रात के समय सभा सचिवालय आने की आवश्यकता नहीं पड़ी. साथ ही विधानसभा सचिवालय द्वारा कार्यसूची भी पोर्टल पर समय से अपलोड की गई. जिससे सदस्यों को सदन के कार्यों की पूर्व जानकारी प्राप्त हो सकी. सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए भले ही स्थगित कर दी गई है. लेकिन 17 दिनों का यह कार्यदिवस वाकई में कई मायनों में अहम रहा.

सकारात्मक और शांतिपूर्ण सफल हुआ बजट सत्र: स्पीकर

स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने इस सत्र को एतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सत्र शांतिपूर्ण और सकारात्मक माहौल में संपन्न हुआ. जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी भूमिका बखूबी निभाई. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष ने भी जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सदन में रखा और सरकार ने उन पर गंभीरता से विचार किया. उन्होंने भरोसा जताया कि इस सत्र में लिए गए निर्णय आने वाले समय में झारखंड के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होंगे और राज्य की साढ़े तीन करोड़ जनता की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे.

15 सालों में सबसे बेहतर रहा बजट सत्र: वित्त मंत्री

संसदीय कार्य सह वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस सत्र को बीते 15 सालों में सबसे बेहतर और शांतिपूर्ण सत्र बताया है. उन्होंने सत्र की कार्यवाही को लेकर संतोष जताते हुए कहा कि झारखंड में यह उनका तीसरा कार्यकाल है और बिहार विधानसभा में भी तीन बार रहने के बावजूद इतना बेहतर और शांतिपूर्ण सत्र उन्होंने पहले कभी नहीं देखा. उन्होंने कहा कि यह सत्र काफी शांतिपूर्ण और फलदायक रहा. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने मिलकर सदन को सुचारू रूप से चलाया.

विधायकों द्वारा उठाए सवालों का दिया गया जवाब: वित्त मंत्री

वित्त मंत्री ने कहा कि जनकल्याण से जुड़े मुद्दे उठाए गए और सरकार ने सभी सवालों का संतोषजनक जवाब दिया. यही कारण रहा कि विपक्ष ने भी ज्यादा हंगामा नहीं किया. मंत्री ने कहा कि इस बार का बजट आकार में बड़ा है और सरकार राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ अधिक राशि जनकल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करेगी.

उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि इस बार सदन पूरी तरह संतुलित और निष्पक्ष तरीके से चला. सभी को बोलने का पूरा अवसर मिला और अध्यक्ष ने पूरी निष्पक्षता के साथ सदन का संचालन किया. जिसमें पक्ष और विपक्ष दोनों को बराबर समय मिला.

मंत्री को नहीं दिया जा रहा सही जानकारी: सीपी सिंह

बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच शब्दों का वाण चलता रहा. विपक्ष सत्र के अंतिम दिन तक सरकार पर सदन में चर्चा से भागने का आरोप लगाती रही. वहीं सत्तापक्ष विपक्ष के आरोपों को खारिज करने में जुटे रहे. भाजपा विधायक सीपी सिंह एक बार फिर सदन की कार्यवाही साल में कम से कम 60 दिन होने की मांग करते हुए सरकार पर निशाना साधते दिखे. उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों के द्वारा विभाग के मंत्री को सही जानकारी नहीं दिया जा रहा है.

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