झारखंड की राजधानी रांची में शनिवार को एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला, जब राज्य भर से थैलेसीमिया, सिकल सेल और अप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों ने इलाज व जरूरी सुविधाओं की मांग को लेकर राजभवन मार्च किया। इन मरीजों ने सरकार से अपील की कि उनके लिए इलाज के समुचित संसाधन उपलब्ध कराए जाएं ताकि वे भी सामान्य जीवन जी सकें और शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहें।
झारखंड में इन रोगों से ग्रसित मरीजों को खून और जरूरी दवाइयों के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में न तो ब्लड मिल पाता है, न ही जरूरी दवाएं। स्थिति इतनी खराब है कि पूरे राज्य में थैलेसीमिया और सिकल सेल के इलाज के लिए केवल एक विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में थैलेसीमिया, सिकल सेल और अप्लास्टिक एनीमिया के मरीजों की संख्या करीब 11 हजार है। वहीं, देशभर में थैलेसीमिया के एक लाख और सिकल सेल के डेढ़ लाख मरीज हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड में इन बीमारियों का प्रचलन राष्ट्रीय औसत से दोगुना है, जो कि चिंता का विषय है।
राज्य में रांची स्थित सदर अस्पताल इन बीमारियों के इलाज का प्रमुख केंद्र है, लेकिन यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, सदर अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट का कहना है कि अस्पताल में मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था मौजूद है।
मरीजों और उनके परिजनों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द ब्लड बैंक, दवाओं की उपलब्धता, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और रोगियों के लिए विशेष योजनाएं लागू करे, ताकि उन्हें बेसिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सड़कों पर उतरने की जरूरत न पड़े।










