समग्र शिक्षा के वार्षिक कार्य योजना एवं बजट के लिए चलाए जा रहे डहर Digital Habitation Mapping and Real-Time Monitoring 2.0 सर्वे में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। धर्म से संबंधित कॉलम में अब ‘अन्य’ विकल्प शामिल कर दिया गया है, जिससे सरना या आदिवासी धर्म मानने वाले बच्चों की पहचान भी आधिकारिक तौर पर दर्ज हो सकेगी। इससे पहले प्रपत्र में केवल हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध धर्म के कॉलम मौजूद थे, जिसके कारण आदिवासी संगठनों ने विरोध जताया था।
सर्वे में संशोधन – 11 दिसंबर से पोर्टल पर लागू
शिक्षा विभाग ने विरोध और आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए सर्वे फॉर्म में बदलाव किया है। विभाग की ओर से यह संशोधन 11 दिसंबर को प्रभावी किया गया, जिसके बाद अब पोर्टल पर धर्म कॉलम में ‘Others’ विकल्प उपलब्ध है। यहां आदिवासी छात्र अपना धर्म सरना या आदिवासी के रूप में अंकित कर सकते हैं।
कौन से बच्चों का हो रहा सर्वे
डहर 2.0 के तहत 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों का सर्वे किया जा रहा है। इसमें यह दर्ज किया जा रहा है कि बच्चे विद्यालय में नामांकित हैं या ड्रॉपआउट। इसी डेटा के आधार पर केंद्र सरकार हर वर्ष समग्र शिक्षा के बजट और वार्षिक योजना को मंजूरी देती है। इसलिए यह सुधार स्कूली शिक्षा अधिकारों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आदिवासी संगठनों ने क्यों जताया था विरोध
सर्वे में ‘अन्य’ धर्म विकल्प न होने पर आदिवासी नेता प्रेमशाही मुंडा, पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, देवकुमार धान, पवन तिर्की समेत कई संगठनों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि धर्म कॉलम में सरना या आदिवासी की पहचान न होने से बच्चों की वास्तविक संख्या दर्ज नहीं हो पाएगी, जिससे उनके अधिकार और समग्र शिक्षा की योजनाओं का लाभ सीमित हो सकता है। इसलिए ‘अन्य’ विकल्प जोड़ना अत्यंत आवश्यक था।










