चार लेबर कोड के खिलाफ कोयलांचल ठप, CCL–BCCL में व्यापक हड़ताल

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केंद्र सरकार द्वारा लागू चार नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के विरोध में विभिन्न मजदूर संगठनों ने देशव्यापी हड़ताल की. जिला के बेरमो कोयलांचल में संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा ने हड़ताल का समर्थन किया है. कोलियरियों के सभी परियोजना में काम पूरी तरह से बंद है. कोयला उत्पादन से लेकर कोयला ट्रांसपोर्टिंग बाधित हो गया है. मजदूर संगठनों के नेता और मजदूर परियोजना पर पहुंचे और बंद के समर्थन में नारेबाजी की.

मजदूर यूनियन के नेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा लाए गए ‘फॉर लेबर कोड’ से मजदूर के अधिकारों का हनन होगा. नेताओं का कहना है कि कोलियरियों में मजदूरों के साथ आए दिन दुर्घटनाएं होती है, जिसमें कई लोगों की जान भी चली जाती है. इसके तहत प्रावधान है कि उन मजदूरों के आश्रित को तत्काल प्रभाव से नियुक्ति दिया जाए. अगर कर्मचारी काम करने में अस्वस्थ है या अनफिट है तो उसके स्थान पर आश्रित को नियुक्ति दी जाती थी. इन सभी कानूनों पर धीरे-धीरे सरकार द्वारा रोक लगाते हुए इस 4 लेबर कोड के आने से पूर्ण रूप से समाप्त करने की साजिश हो रही है.

इसी को लेकर कोल इंडिया की अनुषांगिक इकाई सीसीएल के ढोरी एरिया, एरिया एकाउंट औफिस, एरिया सेल औफिस, ढोरी जीएम औफिस, महिला क्लब ढोरी, बोकारो और करगली एरिया के खास महल प्रोजेक्ट कारो प्रोजेक्ट एवं कथारा एरिया के गोविंदपुर प्रोजेक्ट में कार्यरत कर्मचारी आज हड़ताल में शामिल है. इस भारत बंद में इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू के कार्यकर्ता झंडा, बैनर, पोस्टर लगाकर आज हड़ताल के समर्थन में नारेबाजी की.

सीटू के केंद्रीय सचिव विजय भोई ने कहा कि राज्य में एक औद्योगिक अशांति बहाल हो जाएगी. मजदूरों को 8 घंटे की जगह 12 घंटे ड्यूटी करना पड़ेगा. मजदूरों के हड़ताल करने का अधिकार समाप्त हो जाएगा, यह कॉर्पोरेट समर्थक मजदूर विरोधी कानून है. इस कानून के तहत जेबीसीसीआई को समाप्त कर दिया जाएगा. नेताओं का कहना है कि सिर्फ एक यूनियन बीएमएस इस बंद में शामिल नहीं है, लेकिन उनका नैतिक समर्थन बंद के साथ है. बीएमएस सरकार का सहयोगी यूनियन है. इसलिए वह सीधे तौर पर बंद में शामिल नहीं है.

वहीं, बंद में शामिल जनता मजदूर संघ के सचिव संतोष कुमार ने कहा कि हमें केंद्र सरकार से कोई नाराजगी नहीं है, लेकिन उनकी नीतियों के खिलाफ हमलोगों ने आज बंद का आह्वान किया है. फॉर लेबर कोर्ड लागू करना मजदूर की अनदेखी और उसके अधिकारों का हनन है. जबकि बोकारो एंड करगली के महाप्रबंधक एसके झा का कहना है कि सभी परियोजना में आउटसोर्सिंग के द्वारा काम हो रहा है. हम लोग प्रयास कर रहे हैं कि यूनियन के सदस्यों से बात कर काम पर वापस लाया जाए. नुकसान के संबंध में उन्होंने बताया कि अभी आकलन लगाना मुश्किल है कि कितना नुकसान हुआ है.

धनबाद में भी दिखा बंद का व्यापक असर

कोयला नगरी धनबाद में भी बंद का व्यापक असर देखने को मिला. बीसीसीएल और ईसीएल की कई कोलियरियों में उत्पादन और डिस्पैच प्रभावित रहा. संयुक्त मोर्चा के बैनर तले एटक, इंटक, जनता मजदूर संघ, आरसीएमएस, बिहार कोलियरी कामगार यूनियन समेत अन्य संगठनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और लेबर कोड को वापस लेने की मांग की. ब्लॉक-2 हाजिरी घर, शताब्दी कोलियरी सहित विभिन्न परियोजनाओं में हड़ताल का असर देखा गया.

मजदूर नेताओं का आरोप है कि चारों लेबर कोड मजदूर विरोधी हैं और इससे श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे. उनका कहना है कि नए प्रावधानों से ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण का रास्ता साफ होगा. यूनियनों ने सरकार से श्रमिक हितों की रक्षा करने और श्रम कानूनों में संशोधन पर पुनर्विचार की मांग की है.

यूनियनों का दावा है कि एक दिन की हड़ताल से कोयला कंपनियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है. हालांकि प्रबंधन की ओर से आधिकारिक रूप से नुकसान के संबंध में कोई बयान जारी नहीं किया गया है. लेबर कोड के विरोध में प्रस्तावित हड़ताल के मद्देनजर बीसीसीएल प्रबंधन के द्वारा पहले से ही अपने कर्मचारियों से कार्य में सुनिश्चित भागीदारी निभाने की अपील कर रखी है. प्रबंधन द्वारा चेतावनी भी दी गई है कि हड़ताल में शामिल कर्मचारियों के वेतन नो वर्क नो पे के आधार पर काट दी जाएगी.

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