जंगल में मिले 5 ओरंगुटान, दीघा में करोड़ों का सौदा! जांच में सामने आई
बालेश्वर जिले के भोगराई स्थित बिचित्रपुर-कैसुआरिना जंगल में मिले पांच दुर्लभ ओरंगुटान शावकों का रहस्य अब ओडिशा से निकलकर पश्चिम बंगाल तक पहुंच गया है।
जांच में दीघा के एक होटल में कथित एक करोड़ रुपये के सौदे और घटनास्थल तक पहुंची एक काली थार की भूमिका सामने आने के बाद वन्यजीव तस्करी के संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच तेज हो गई है।
ओडिशा पुलिस की एसटीएफ ने दीघा के एक होटल से तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। हालांकि कथित एक करोड़ रुपये के सौदे और इन लोगों की तस्करी में भूमिका की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
होटल में छह संदिग्ध, तीन से पूछताछ
सूत्रों के अनुसार, दीघा के होटल में छह संदिग्धों के ठहरने की जानकारी जांच एजेंसियों को मिली है। इनमें तीन लोगों का विवरण होटल रजिस्टर में दर्ज था, जबकि अन्य तीन की पहचान संबंधी जानकारी संदिग्ध बताई जा रही है।
एसटीएफ ने इनमें से तीन लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। सूत्रों के मुताबिक हिरासत में लिया गया एक व्यक्ति उस काली थार से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसकी गतिविधियां जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई हैं।
जांच एजेंसियां कथित तौर पर एक बंगाली पिता-पुत्र की जोड़ी की भी तलाश कर रही हैं। उनके कोलकाता चले जाने की सूचना है और हावड़ा स्थित संभावित ठिकानों समेत कई स्थानों पर उनकी तलाश की जा रही है।
25 लाख से एक करोड़ तक पहुंची कथित कीमत
जांच में सामने आए एक अहम सुराग के मुताबिक, दीघा के होटल में बालेश्वर के एक प्रभावशाली व्यक्ति को ओरंगुटान शावक बेचने का कथित सौदा हुआ था। पहले प्रत्येक शावक की कीमत करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही थी, लेकिन कथित तौर पर कीमत बढ़कर करीब एक करोड़ रुपये प्रति शावक तक पहुंचने की बात सामने आई है।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यही वजह है कि एसटीएफ अब होटल में ठहरने वाले लोगों, उनके मोबाइल फोन, संपर्कों, वाहन और संभावित वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
काली थार बनी जांच की सबसे अहम कड़ी
जांचकर्ताओं की नजर उस काली थार पर है, जो शावकों के मिलने से कुछ घंटे पहले बिचित्रपुर जंगल की ओर जाती दिखाई दी थी। स्थानीय स्तर पर मिले सीसीटीवी फुटेज में सोमवार रात करीब 10:56 बजे काली थार के पीछे एक सफेद कार भी दिखाई देने की बात सामने आई है। दोनों वाहनों के मुख्य सड़क से हटकर अंदरूनी रास्तों की ओर जाने की जानकारी जांच का हिस्सा है।
इसके बाद एक उर्वरक दुकान के सीसीटीवी में रात करीब 11:35 बजे थार के भोगराई स्थित जंगल क्षेत्र के पास पहुंचने और कुछ देर बाद वापस लौटने की तस्वीर मिलने की बात सामने आई है। यही फुटेज अब जांचकर्ताओं के लिए अहम सुराग बन गया है।
ओडिशा और पश्चिम बंगाल पुलिस ने सीमा क्षेत्र में सीसीटीवी खंगालने का अभियान तेज किया है। अब तक उदयपुर से दीघा के बीच करीब 186 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा अंदरूनी मार्गों पर लगे कैमरों को भी जांच के दायरे में लिया गया है।
सिर्फ थार नहीं, पूरे नेटवर्क की तलाश
एसटीएफ और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्लूसीसीबी) अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि पांचों ओरंगुटान भारत में कहां से आए, किस रास्ते से ओडिशा पहुंचे, उन्हें किसने परिवहन किया और उनका अंतिम गंतव्य क्या था।
जांच में समुद्री मार्ग की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। भारतीय तटरक्षक बल से भी संभावित समुद्री रास्ते की जांच में सहयोग लिए जाने की खबर है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि ओडिशा को विदेशी वन्यजीवों की तस्करी का ट्रांजिट रूट नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने केंद्र, डब्ल्यूसीसीबी और अन्य एजेंसियों के समन्वय से व्यापक जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बिचित्रपुर से नंदनकानन तक कड़ी सुरक्षा
8 सितंबर को भोगराई के बिचित्रपुर-बड़ापहाड़ी क्षेत्र में पांच ओरंगुटान शावक पाए गए थे। ओरंगुटान भारत के मूल वन्यजीव नहीं हैं और उनका प्राकृतिक आवास मुख्यतः बोर्नियो तथा सुमात्रा के वर्षावन हैं। इसलिए उनका ओडिशा के जंगल में मिलना सामान्य घटना नहीं, बल्कि तस्करी या अवैध कैद से जुड़े बड़े सवाल खड़े करता है।
रेस्क्यू के बाद पांचों शावकों को नंदनकानन चिड़ियाघर लाया गया है। वहां उन्हें क्वारंटाइन में रखा गया है। तीन समर्पित केयरटेकर तीन शिफ्टों में उनकी देखभाल कर रहे हैं, हर दो घंटे में भोजन दिया जा रहा है और संक्रमण रोकने के लिए कड़े बायोसिक्योरिटी प्रोटोकॉल लागू हैं।
ताजा जानकारी के अनुसार पांचों की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है। उनके डीएनए परीक्षण की तैयारी की जा रही है। केंद्र के चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति के बाद ही यह तय होगा कि उन्हें नंदनकानन में रखा जाएगा या आगे इंडोनेशिया भेजने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इंडोनेशियाई पक्ष की ओर से उन्हें वापस भेजने की मांग की खबर भी सामने आई है।
बड़ा सवाल….कहां से आए पांचों ‘मेहमान’?
अब जांच की असली दिशा सिर्फ यह पता लगाना नहीं है कि शावकों को जंगल में किसने छोड़ा। असली सवाल है…..इन पांचों को भारत तक कौन लाया, किस सीमा या मार्ग से लाया गया, किसके लिए लाया गया और इनका अंतिम खरीदार कौन था?
विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि पूर्वोत्तर पर कार्रवाई बढ़ने के बाद तस्कर वैकल्पिक मार्ग तलाश रहे हो सकते हैं। बांग्लादेश-पश्चिम बंगाल-ओडिशा कॉरिडोर की संभावना भी जांच के दायरे में है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इतने दुर्लभ और संवेदनशील वन्यजीवों की तस्करी सामान्य स्तर का अपराध नहीं हो सकती; इसके पीछे संगठित नेटवर्क और विशेषज्ञता की भूमिका की भी जांच जरूरी है।
अब दीघा का होटल, काली थार, सीसीटीवी फुटेज और पांचों ओरंगुटानों की भारत तक पहुंचने की कड़ी ये चारों बिंदु जांच की सबसे महत्वपूर्ण धुरी बन चुके हैं। इनके बीच का संबंध खुला तो संभव है कि पांच शावकों की बरामदगी के पीछे छिपा पूरा अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क सामने आ जाए।
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