Share this News:JPSC में नियुक्तियां नहीं, युवाओं का भविष्य और शिक्षकों की प्रोन्नति अधर मेंShare this News:
झारखंड में 3 महीने से JPSC ठप, अध्यक्ष-सदस्य नहीं; 30 से अधिक परीक्षाएं और शिक्षकों की प्रोन्नति अटकी

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) इन दिनों गंभीर प्रशासनिक संकट के दौर से गुजर रहा है. आयोग के अध्यक्ष और सभी सदस्यों के पद पिछले लगभग तीन महीनों से खाली पड़े हैं, जिसके चलते संस्थान का कामकाज पूरी तरह से ठप हो चुका है. स्थिति यह है कि आयोग के अधिकारी और कर्मचारी नियमित रूप से कार्यालय तो पहुंच रहे हैं, लेकिन बिना किसी काम के सिर्फ समय बिताकर शाम को लौट जा रहे हैं.
हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी के बाद भी नहीं हुई नियुक्तियां
इस मामले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है. अदालत ने विगत 10 सितंबर को राज्य सरकार को कड़ा निर्देश देते हुए दो महीने के भीतर अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करने को कहा था. हालांकि, अब तक इस पर कोई ठोस अमल नहीं हो सका है. इसे देखते हुए कोर्ट ने सरकार को 18 नवंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है, ताकि मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को हो सके. गौरतलब है कि सीआईडी जांच के सिलसिले में तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने 22 जुलाई 2026 को इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद तीनों सदस्यों- डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने भी 9 अगस्त 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.
विश्वविद्यालयों के शिक्षकों को हो रहा भारी वित्तीय नुकसान
आयोग के खाली रहने का सबसे बुरा असर राज्य के विश्वविद्यालयों के शिक्षकों की प्रोन्नति पर पड़ा है, जिससे उनकी शैक्षणिक व्यवस्था भी चरमरा गई है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पात्रता और प्रोन्नति की वास्तविक तिथि से वित्तीय लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ था, लेकिन जेपीएससी में ताला लटकने के कारण यह प्रक्रिया अटक गई है. प्रोन्नति में देरी होने से शिक्षकों को वेतन और एरियर का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. स्थिति यह है कि 2008 बैच के कई असिस्टेंट प्रोफेसर अपनी पहली प्रोन्नति के लिए वर्षों से इंतजार कर रहे हैं. स्टेज वन से स्टेज टू तक के लगभग 100 शिक्षकों की प्रोन्नति रुकी हुई है, जिनमें सीबीआई जांच के दायरे में शामिल करीब 60 शिक्षक भी शामिल हैं. शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि समय पर प्रोन्नति हुई होती, तो 2008 बैच के शिक्षक साल 2023 में ही प्रोफेसर बन गए होते.
30 से अधिक परीक्षाएं अधर में, उच्चस्तरीय कमेटी का इंतजार
भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं का हाल भी बद से बदतर हो गया है. पूर्व में नौ परीक्षाओं को स्थगित किया गया था, जबकि 21 अन्य परीक्षाओं के रद्द होने से संकट और गहरा गया है. जेपीएससी के परीक्षा कैलेंडर के अनुसार संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रेगुलर 2025, सिविल सेवा बैकलॉग 2023 व 2025, सिविल जज, एपीपी, फैक्ट्री इंस्पेक्टर, प्रोजेक्ट मैनेजर, बॉयलर इंस्पेक्टर, यूनिवर्सिटी अधिकारी और झारखंड पात्रता परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाएं अटकी हुई हैं. सरकार ने इन सभी परीक्षाओं की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी के गठन की घोषणा तो की थी, लेकिन धरातल पर अब तक वह भी संभव नहीं हो पाया है.
कुलपति और प्रतिकुलपति बनने के अवसरों पर भी लग रहा ग्रहण
इस प्रशासनिक सुस्ती का असर केवल जूनियर शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा सीनियर पदों तक पहुंच गया है. प्रोफेसर के रूप में आवश्यक न्यूनतम अनुभव पूरा न हो पाने के कारण कई वरिष्ठ शिक्षक विश्वविद्यालय में कुलपति (VC) और प्रतिकुलपति (Pro-VC) के पद के लिए योग्य होने से चूक जा रहे हैं. इसके अलावा, कई मामलों में तो प्रोन्नति की प्रक्रिया वर्षों तक लंबित रहने और इसी बीच शिक्षकों के सेवानिवृत्त हो जाने से गंभीर तकनीकी और कानूनी परेशानियां भी खड़ी हो रही हैं.
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