कलश स्थापना के साथ हो रही है, कई जहगों को इसे घटस्थापना भी कहा जाता है. नवरात्रि के
शारदीय नवरात्रि 2026 (Sharadiya Navratri 2026) की शुरुआत आज, रविवार, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के साथ हो रही है, कई जहगों को इसे घटस्थापना भी कहा जाता है. नवरात्रि के दौरान, नौ दिनों तक देवी दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है. पहला दिन देवी शैलपुत्री को समर्पित होता है. हिंदू धर्म में, नवरात्रि के पहले दिन कलश की स्थापना को बहुत महत्वपूर्ण और जरूरी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश में भगवान गणेश, त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) और नौ ग्रहों (नवग्रह) का वास माना जाता है.
पश्चिम बंगाल के जाने-माने और लोकप्रिय ज्योतिषी राहुल डे का कहना है कि कलश स्थापना के बिना नवरात्रि की नौ दिनों की पूजा अधूरी मानी जाती है, क्योंकि व्रत रखने और शक्ति साधना करने का संकल्प इसी रस्म के बाद लिया जाता है. इस खबर में कलश स्थापना के लिए जरूरी सामग्री और सरल विधि के बारे में जानें…
साफ तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश
पानी और आम के पत्ते
लाल या पवित्र कपड़े में लिपटा हुआ नारियल
लाल पवित्र धागा या कलावा
अक्षत (साबुत चावल के दाने)
रोली, कुमकुम और हल्दी
फूल और ताजे फूलों की माला
दीया, रुई की बत्तियां और घी या तेल
अगरबत्ती और कपूर
पूजा की साफ थाली
स्वच्छ जल और गंगाजल
सुपारी और सिक्का
साफ और उपजाऊ मिट्टी
कैसे करें कलश स्थापना?
कलश स्थापना से पहले, पूजा घर या पूजा के लिए तय जगह को साफ करें. लकड़ी की एक साफ चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. मिट्टी से भरा एक चौड़ा मिट्टी का बर्तन लें, उसमें जौ के बीज बोएं और उसके ऊपर कलश रखें या फिर, कलश के आधार के लिए चावल का एक छोटा ढेर बनाएं. कलश को साफ पानी या गंगाजल से लगभग तीन-चौथाई भरें. इसमें एक सिक्का, थोड़े अक्षत (बिना टूटे चावल के दाने), दूर्वा घास, एक सुपारी और एक चुटकी हल्दी डालें. आप हल्दी के गांठ भी डाल सकते हैं. अब ‘ॐ’ का जाप करते हुए, कलश के गले पर कलावा बांधें.
इसके बाद, कलश के मुंह पर आम या अशोक के पांच या सात पत्ते इस तरह लगाएं कि वे बाहर की ओर फैले रहें. एक नारियल को लाल कपड़े में लपेटें और उसे पत्तों के ऊपर मजबूती से रखें, जो कलश का शिखर या ऊपरी हिस्सा बनेगा. कलश पर रोली और कुमकुम का तिलक लगाएं. फूल और अक्षत चढ़ाएं, और देवताओं का आह्वान करें.
कुछ विशेष मंत्रों का जाप करके या बस भगवान गणेश, देवी लक्ष्मी और भगवान वरुण को कलश में विराजमान होने के लिए बुलाकर, एक दीया और अगरबत्ती जलाएं, नैवेद्य (पवित्र भोग) चढ़ाएं और स्थापित कलश के सामने आरती करें. इस तरह कलश स्थापित हो जाएगा.
देवी शैलपुत्री को पहले दिन क्या भोग अर्पित करना चाहिए?
देवी शैलपुत्री को शुद्ध गाय का घी या उससे बनी मिठाइयां (जैसे खीर या पेड़ा) अर्पित करना चाहिए. शुद्ध घी से बना भोग माता को बेहद पसंद है. ऐसा माना जाता है कि शुद्ध घी का भोग लगाने से भक्त को रोग-मुक्त जीवन और शारीरिक शक्ति का आशीर्वाद मिलता है.
देवी शैलपुत्री को नारंगी रंग विशेष रूप से पसंद
नवरात्रि के पहले दिन, देवी शैलपुत्री को नारंगी रंग विशेष रूप से पसंद हैं. भक्तों को इस दिन इसी रंग के कपड़े पहनने चाहिए. खुशी जाहिर करने के अलावा, यह रंग जोश और सफलता का भी प्रतीक है.
(डिस्क्लेमर: धर्म, ज्योतिष, वास्तु, फेंगशुई आदि पर आधारित यह लेख केवल पाठकों की जानकारी के लिए है. इससे जुड़ी किसी भी प्रक्रिया को आजमाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. हमारा मकसद सिर्फ पाठकों को जानकारी देना है, News Frame इन तथ्यों की पुष्टि नहीं करता है.)
Subscribe to Our Newsletter
Keep in touch with our news & offers











