ICAR-IIAB और किंग फिशरीज के बीच MoU, सतत मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा

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रांची: ICAR-भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान और किंग फिशरीज के बीच 29 मई 2026 को सतत मत्स्य पालन, मत्स्य नवाचार, अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं आजीविका विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह समझौता डॉ. सुजय रक्षित तथा किंग फिशरीज के प्रतिनिधियों द्वारा दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों और अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

समझौते के तहत वैज्ञानिक मत्स्य प्रजनन, हैचरी प्रबंधन, मत्स्य स्वास्थ्य एवं पोषण, एकीकृत मत्स्य पालन प्रणाली, सजावटी मत्स्य पालन, मत्स्य क्षेत्र में नैनो प्रौद्योगिकी के उपयोग तथा जलवायु-सहिष्णु मत्स्य पालन पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

दोनों संस्थान मिलकर मत्स्य पालकों, जनजातीय युवाओं, महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, प्रदर्शन, एक्सपोजर विजिट और उद्यमिता विकास कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप, क्षेत्र आधारित अनुसंधान, प्रौद्योगिकी सत्यापन और आधुनिक मत्स्य तकनीकों के प्रसार पर भी संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा।

इस अवसर पर डॉ. सुजय रक्षित ने कहा कि वैज्ञानिक हस्तक्षेप और संस्थागत सहयोग के माध्यम से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने तथा झारखंड को सतत मत्स्य एवं जलीय कृषि विकास के मॉडल राज्य के रूप में विकसित करने की दिशा में यह पहल अहम साबित होगी।

उन्होंने कहा कि यह समझौता मत्स्य क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और उद्यमिता के नए अवसर पैदा करेगा, जिससे ग्रामीण समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास और आजीविका संवर्धन को भी बल मिलेगा।

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