झारखंड स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (JSMDC) द्वारा संचालित बालू घाटों से होने वाली आय उसके खर्चों की तुलना में कम रही है। महालेखाकार (एजी) की रिपोर्ट के अनुसार Sand Ghats Operation में कमीशन, एजेंसियों को भुगतान और वैधानिक कटौतियों के कारण निगम को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है। यह स्थिति वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2021-22 के वार्षिक लेखा के तुलनात्मक अध्ययन में सामने आई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2018 से 2022 के बीच JSMDC ने एक वर्ष में अधिकतम 15 बालू घाटों से ही बिक्री की। इस अवधि में बालू विक्रय से कुल 18.09 करोड़ रुपये की आय हुई। इसमें से 15 प्रतिशत कमीशन के रूप में 1.81 करोड़ रुपये और करीब चार करोड़ रुपये वैधानिक कटौतियों में खर्च हुए। इसके बाद निगम का प्रत्यक्ष व्यय 10.60 करोड़ रुपये रहा, जिसके चलते 32.30 लाख रुपये की हानि दर्ज की गई।
एजी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि Sand Ghats Operation को अधिक कुशल और योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया जाता, तो राज्य सरकार को उल्लेखनीय लाभ मिल सकता था। वर्ष 2020 से 2022 के बीच उपलब्ध बालू भंडार के 60 प्रतिशत उत्पादन को आधार मानकर राजस्व क्षमता का आकलन किया गया।
इस आकलन के अनुसार, यदि JSMDC ने संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया होता, तो राज्य सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 11.51 करोड़ से 12.25 करोड़ रुपये तक का लाभ संभव था। रिपोर्ट में घाटों के प्रबंधन और खर्च नियंत्रण में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।










