आय से अधिक संपत्ति मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने निलंबित आइएएस अधिकारी विनय चौबे के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ाते हुए सोमवार को बड़ी कार्रवाई की। एसीबी ने विनय चौबे सहित सात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि उन्होंने अवैध कमाई को छिपाने के लिए परिवार और परिचितों के खातों का नेटवर्क बनाकर भारी रकम इधर-उधर ट्रांसफर की।
FIR में विनय चौबे के साथ उनकी पत्नी स्वप्ना संचिता, ससुर सत्येंद्र नाथ त्रिवेदी, साला शिपिज त्रिवेदी, साले की पत्नी प्रियंका त्रिवेदी, सहयोगी विनय सिंह और उनकी पत्नी संचिता सिंह के नाम शामिल हैं। एसीबी के अनुसार, चौबे ने अपने कार्यकाल में अवैध साधनों से कमीशन और अन्य तरीकों से धन संग्रह किया और फिर उसे निवेश तथा संपत्ति के रूप में खपाया।
एसीबी सूत्रों के मुताबिक, विनय चौबे ने अपनी पत्नी, साला, ससुर, दोस्त और दोस्त की पत्नी के बैंक खातों को मनी ट्रांसफर चैनल की तरह इस्तेमाल किया। एक खाते से दूसरे और फिर तीसरे खाते में रकम भेजी जाती थी। इन पैसों का उपयोग नकद लेनदेन, आरटीजीएस के जरिये भुगतान, लोन चुकाने, संपत्ति खरीदने और निजी कंपनियों को पेमेंट करने में किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि विनय चौबे के नियंत्रण वाले विभिन्न खातों और रिश्तेदारों के खातों में कुल 3.47 करोड़ रुपये पहुंचे। जबकि उनकी वास्तविक ज्ञात आय सिर्फ 2.20 करोड़ रुपये थी। एसीबी ने कहा कि लगभग 1.27 करोड़ रुपये की संपत्ति उनकी आय से 53 प्रतिशत अधिक है, जो स्पष्ट रूप से अवैध कमाई की ओर इशारा करती है।
उधर, जमीन घोटाला मामले में एसीबी ने विनय चौबे को सोमवार को रिमांड पर लेकर हजारीबाग ले जाया। वह रिम्स में इलाजरत थे और कोर्ट ने दो दिनों की रिमांड मंजूर की है। आरोप है कि नेक्सजेन के मालिक विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह ने हजारीबाग में 28 डिसमिल गैरमजरूआ जमीन खरीदी थी। इसका दाखिल-खारिज भी कराया गया, और जांच में पता चला कि उस प्रक्रिया को मंजूरी दिलाने के लिए ऑफिसर के रूप में विनय चौबे ने अंचल कर्मियों पर दबाव बनाया था।
एसीबी अब इस रिमांड अवधि में जमीन सौदे की पूरी प्रक्रिया, दबाव बनाने की भूमिका और कथित अवैध ट्रांजैक्शन की जानकारी जुटाएगी।










