आईसीएआर–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB), रांची द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माध्यम से जारी की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 21वीं किस्त का बुधवार को संस्थान परिसर में लाइव अवलोकन किया गया। इस कार्यक्रम में 300 से अधिक किसानों, विशेषज्ञों और हितधारकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने की। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. वी. पी. भदाना, संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) डॉ. के. के. कृष्णानी तथा गढ़खातांगा पंचायत के पूर्व मुखिया रितेश उरांव विशेष रूप से उपस्थित रहे।
9 करोड़ किसानों को 18,000 करोड़ की किस्त जारी
कार्यक्रम में बताया गया कि पीएम-किसान की 21वीं किस्त के तहत लगभग 9 करोड़ किसानों को डीबीटी के माध्यम से ₹18,000 करोड़ सीधे उनके खातों में स्थानांतरित किए गए हैं। इस किस्त के साथ योजना के अंतर्गत अब तक ₹3.70 लाख करोड़ से अधिक की राशि देशभर के 11 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को वितरित की जा चुकी है।
तकनीकी सत्रों में तिलहन, दलहन, प्राकृतिक खेती पर जोर
कार्यक्रम के दौरान कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
डॉ. जयंता लेक ने तिलहन और दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।
डॉ. कार्तिक शर्मा ने जैविक और प्राकृतिक खेती के महत्व तथा इससे संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।
वहीं, डॉ. खेळाराम सोरेन ने सतत कृषि और जल संरक्षण को भविष्य की अनिवार्य जरूरत बताते हुए किसानों को इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।
डिजिटल प्रणालियों से बढ़ी पारदर्शिता
कार्यक्रम में पीएम-किसान योजना के कार्यान्वयन में डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर भी बल दिया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि—
आधार आधारित ई-केवाईसी,
डिजिटाइज्ड भू-अभिलेख,
और पीएम-किसान पोर्टल ने लाभार्थियों के सत्यापन और किस्त के समय पर वितरण में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित की है।
किसान-ईमित्र एआई चैटबॉट और मोबाइल ऐप पर चर्चा
किसानों को रियल-टाइम जानकारी, शिकायत निवारण और योजना से संबंधित अपडेट देने के लिए किसान-ईमित्र एआई चैटबॉट और पीएम-किसान मोबाइल एप्लिकेशन को अत्यंत उपयोगी डिजिटल टूल बताया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को इन सेवाओं का अधिकाधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
किसानों और वैज्ञानिकों के संवाद के साथ कार्यक्रम समाप्त
कार्यक्रम के अंत में किसानों और ICAR-IIAB के वैज्ञानिकों के बीच खुला संवाद हुआ, जिसमें किसानों ने अपनी समस्याएँ रखीं और विशेषज्ञों ने उनके समाधान सुझाए। प्रतिभागियों ने कृषि क्षेत्र के डिजिटलीकरण और सतत खेती को बढ़ावा देने के लिए उठाए जा रहे सरकारी कदमों की सराहना की।









