झारखंड विधानसभा शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन – कमीशन, सिंचाई और फंड देरी पर हंगामा

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झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में आज पीडीएस दुकानदारों के commission payment से लेकर मुंडारी–खूंट कटी जमीन के दाखिल-खारिज, चतरा की सिंचाई व्यवस्था और पंचायती राज विभाग को फंड न मिलने तक कई मुद्दों पर गरमागरम बहस हुई। सवाल विपक्ष की ओर से आए और जवाब मंत्रियों ने दिए, जिसमें देरी, तकनीकी खामी और वित्तीय संकट जैसी बातें सामने आईं।

क्या कहा विधायक सीपी सिंह ने?
विधायक सीपी सिंह ने पूछा कि पीडीएस दुकानदारों को कमीशन का भुगतान आखिर कब तक किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार विस्तृत जवाब दिया जाता है जबकि सवाल सीधा है—क्या उठाव की समाप्ति के तीन महीने के भीतर भुगतान हो रहा है?

मंत्री इरफान का जवाब
मंत्री इरफान ने बताया कि ज्यादातर जिलों में भुगतान कर दिया गया है और जुलाई 2025 तक की राशि भेज दी गई है। उन्होंने माना कि तकनीकी खामी के चलते देरी हुई। विधायक के सवाल पर उन्होंने कहा कि राज्य केंद्र सरकार के भुगतान चक्र को फॉलो करता है।

हरा कार्डधारी आयोग पर बड़ी देरी
विधायक ने यह भी कहा कि हरा कार्डधारियों के वितरण कमीशन में 23 महीने में सिर्फ आठ महीने का भुगतान हुआ है और 15 महीने की राशि अब भी लंबित है। मंत्री ने धन की कमी स्वीकार करते हुए कहा केंद्र से पैसा न मिले तब भी राज्य भुगतान करेगा।

मुंडारी–खूंट कटी जमीन दाखिल-खारिज में गड़बड़ी, जांच होगी
JMM विधायक अमित महतो ने आरोप लगाया कि खूंट कटी और मुंडारी जमीन के दाखिल-खारिज में गलत जानकारी देकर सदन को गुमराह किया गया है। मंत्री दीपक बिरुआ ने स्वीकार किया कि यह प्रक्रिया केवल पुरुष उत्तराधिकारियों के नाम पर की जा सकती है, लेकिन संध्या रानी के नाम से किए गए दाखिल-खारिज की जांच में त्रुटि पाई गई है। दोषियों पर तीन महीने के भीतर कार्रवाई की जाएगी।

चतरा अंजनवा नहर में सिंचाई बंद, अब लिफ्ट सिस्टम बनेगा उपाय
बीजेपी विधायक कुमार उज्ज्वल ने चतरा जिले के अंजनवा नहर में पानी न पहुंचने की समस्या उठाई। मंत्री हफ़ीज़ुल हसन ने बताया कि नदी और नहर की ऊंचाई में अंतर के कारण पानी स्वाभाविक रूप से नहीं जा पा रहा है। उन्होंने कहा कि अब वैकल्पिक व्यवस्था के तहत लिफ्ट सिस्टम से पानी खेतों तक पहुंचाया जाएगा।

पंचायती राज विभाग को फंड जारी करने में देरी पर नाराज़गी
मंत्री दीपिका पांडे ने सदन में कहा कि विपक्ष ने विभाग को बदनाम करने की कोशिश की है, जबकि विभाग ने केंद्र की चारों शर्तें पहले ही पूरी कर ली थीं। उन्होंने बताया कि बार-बार राशि की मांग की गई, लेकिन अभी तक फंड जारी नहीं किया गया है, जिससे कई योजनाएं प्रभावित हुई हैं।

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