कुड़मी समाज की ओर से एसटी दर्जे की मांग को लेकर झारखंड में ‘रेल टेका डोहोर छेका’ (रेल रोको, सड़क घेरो) आंदोलन शुरू हो गया है। इसके चलते झारखंड में पुलिस-प्रशासन हाई अलर्ट पर है और जगह-जगह भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
आरपीएफ के कड़े प्रयासों के बावजूद, आंदोलनकारी हजारीबाग और सरायकेला में रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए। सरायकेला-खरसावां जिले के सोनी रेलवे स्टेशन पर, जहां 350 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात थे, हजारों की संख्या में कुड़मी समाज के लोग रेलवे ट्रैक पर बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनकारियों में पुरुष और महिला दोनों शामिल हैं, जो झंडे लेकर नारेबाजी कर रहे हैं। इस प्रदर्शन के कारण सोनी स्टेशन पर एक मालगाड़ी को रोकना पड़ा। यह आंदोलन शनिवार सुबह पांच बजे से शुरू हुआ, जिसमें लोग अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की अपनी पुरानी मांग को लेकर सड़कों और रेल पटरियों पर उतरे हैं।
रांची जिला प्रशासन की ओर से कहा गया है कि 20 सितंबर को विभिन्न रेलवे स्टेशनों में रेल परिचालन बाधित किए जाने की सूचना है। इन रेलवे स्टेशनों पर विधि व्यवस्था और यातायात व्यवस्था भंग होने की आशंका को देखते हुए एसडीओ रांची की ओर से बीएनएसएस की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मुरी, सिल्ली, खलारी और टाटा सिल्वे रेलवे स्टेशन परिसर के 300 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा जारी की गई है। वहीं 19 सितंबर शाम 6 बजे से ही सरायकेला अनुमंडल के सभी रेलवे लाइनों के 300 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा कर दी है। लेकिन निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद भी, आंदोलनकारी ट्रैक पर जमे हुए हैं। यह निषेधाज्ञा चांडिल, नीमडीह, हैसालोंग, झीमड़ी, तिरूलडीह, लेटमदा, आदित्यपुर, गम्हरिया, विराजपुर, कांड्रा, कुनकी, सीनी, माहलीनुरूप और राजखरसावां जैसे रेलवे स्टेशनों और उनके आसपास के इलाकों में भी लागू की गई है।
आदिवासी कुड़मी समाज के रेल रोको आंदोलन का असर धनबाद रेल मंडल में साफ दिखाई देने लगा है। आंदोलन के कारण आज ट्रेन संख्या 13504 हटिया – बर्द्धमान मेमू एक्सप्रेस को रद्द करने का निर्णय लिया गया है। इस कारण यात्रियों को भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है। वहीं रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और संचालन की दृष्टि से यह कदम उठाना आवश्यक हो गया था। आंदोलनकारियों की ओर से लगातार रेलवे ट्रैक पर धरना देने और नारेबाजी करने से रेल यातायात प्रभावित हुआ है। इस कारण ट्रेनों का सुचारू संचालन संभव नहीं हो पा रहा है।










