JPSC नियुक्ति घोटाले में CBI का बड़ा एक्शन, अब रडार पर कोचिंग संस्थान; 15 लाख की डील की भी जांच

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रांची : JPSC नियुक्ति घोटाले की जांच में अब CBI की रडार पर कोचिंग संस्थान भी आ गये हैं. सीबीआई अब जेपीएससी की 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा में उनकी भूमिका की भी जांच करने में जुट गयी है. ऐसा रांची और हजारीबाग के दो कोचिंग संचालकों के परिसरों में छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज और साक्ष्यों के आधार पर किया जा रहा है.

जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इन संस्थानों के माध्यम से किसी अभ्यर्थी को गलत तरीके से परीक्षा में सफल कराया गया था. साथ ही कोचिंग संस्थानों से जुड़े किन लोगों के संपर्क जेपीएससी या टीडीपीएल के निदेशक और मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के कथित सिंडिकेट से थे, इसकी भी पड़ताल की जा रही है.

साक्षात्कार में सफलता के लिए 15 लाख की डील

ज्ञात हो कि अभय तिवारी ने पूछताछ में सीबीआई को बताया था कि जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा में साक्षात्कार में सफल कराने के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये लिये गये थे. जांच में यह बात भी सामने आयी है कि कथित सिंडिकेट की पहुंच जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते और पूर्व सदस्य डॉ अजीता भट्टाचार्य और डॉ जमाल अहमद तक थी.

कोचिंग संचालकों और आरोपियों के कनेक्शन की जांच

कोचिंग संचालकों के अभय तिवारी या अन्य आरोपियों से संबंध की हो रही जांच पतंजलि कोचिंग के रवि कुमार, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह और कोचिंग संचालक आदित्य पांडेय के नाम भी प्रकरण में सामने आये हैं. सीबीआई के अनुसार जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि जेपीएससी की पूर्व सदस्य डॉ अजीता भट्टाचार्य साक्षात्कार में अभ्यर्थियों को सफल कराने के लिए अपने पीए ब्रजराम के माध्यम से पैसे लेती थीं.

दस्तावेजों से कड़ियां जोड़ रही CBI

वहीं जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते द्वारा मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र के माध्यम से पैसे लिये जाने की बात सामने आयी है. हालांकि इन आरोपों की सत्यता की अभी जांच की जा रही है. छापेमारी में मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सीबीआई अब इन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है.

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