झारखंड नगर निकाय चुनाव को हरी झंडी, फरवरी में एक चरण में होंगे चुनाव

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झारखंड में शहरी राजनीति को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के 48 नगर निकाय क्षेत्रों में फरवरी महीने में चुनाव कराए जाएंगे। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य निर्वाचन आयोग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद अब निकाय चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना कभी भी जारी की जा सकती है। इसके साथ ही होली से पहले पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने की तैयारी कर ली गई है।

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से 9 जनवरी को नगर निकाय चुनाव से संबंधित प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे राज्यपाल ने सोमवार को स्वीकृति प्रदान कर दी। अब यह प्रस्ताव मुख्य सचिव के माध्यम से राज्य चुनाव आयोग को भेजा जाएगा, जिसके बाद राज्य चुनाव आयुक्त अलका तिवारी पूरे चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेंगी।

20 जनवरी के बाद कभी भी जारी हो सकती है अधिसूचना
राज्य निर्वाचन आयोग 20 जनवरी के बाद किसी भी दिन नगर निकाय चुनाव की घोषणा कर सकता है। घोषणा के साथ ही नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी, जो करीब सात दिनों तक चलेगी। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और दो दिन बाद नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तय होगी। इसके बाद प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे।

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 31 मार्च से पहले नगर निकाय चुनाव की पूरी प्रक्रिया समाप्त कर उसकी रिपोर्ट अदालत में सौंपी जाए। इसी समयसीमा को ध्यान में रखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने फरवरी में चुनाव कराने की रूपरेखा तैयार की है।

एक ही दिन होगा सभी 48 निकायों में मतदान
चुनाव आयोग की योजना के मुताबिक राज्य के सभी 48 नगर निकाय क्षेत्रों में मतदान एक ही दिन कराया जाएगा। मतदान 24 से 27 फरवरी के बीच किसी एक दिन कराया जाएगा, जबकि मतगणना 28 फरवरी या 1 मार्च को कराई जा सकती है। इस तरह होली से पहले ही शहरी सरकारों का गठन हो जाएगा।

इन चुनावों में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के वार्ड पार्षद चुने जाएंगे। इसके बाद इन्हीं निर्वाचित वार्ड पार्षदों के जरिए डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष जैसे पदों के लिए भी चुनाव कराए जाएंगे।

बजट सत्र के कार्यक्रम को भी राज्यपाल की मंजूरी
नगर निकाय चुनाव के साथ-साथ राज्यपाल ने झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के कार्यक्रम को भी स्वीकृति दे दी है। इससे सरकार और चुनाव आयोग दोनों के लिए आगे की कार्यवाही का रास्ता साफ हो गया है। चुनाव और बजट सत्र दोनों ही महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियां मानी जा रही हैं, जो राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगी।

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