झारखंड राज्य के मंत्री हफीजुल हसन ने मंगलवार को महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि झारखंड में भविष्य की सभी सरकारी नियुक्तियों के लिए रांची विश्वविद्यालय की डिग्री ही मान्य मानी जाएगी। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आलिम फाजिल डिग्री पर दिए गए आदेश के बाद पैदा हुई भ्रम की स्थिति को दूर करते हुए सरकार ने यह बड़ा निर्णय लिया है।
मंत्री ने कहा कि कुछ समय पहले आलिम फाजिल डिग्री की मान्यता को लेकर कई तरह के सवाल उठे थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि बिना विश्वविद्यालय के किसी भी डिग्री कार्यक्रम को मान्यता नहीं दी जा सकती। इसके बाद राज्य में पूर्व में निकली वैकेंसी, विशेषकर शिक्षकों की नियुक्ति, को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी।
उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार ने इस मामले में महाधिवक्ता से विस्तृत कानूनी सलाह ली। इसके आधार पर निर्णय हुआ कि 2016 की जो वैकेंसी निकली थी और जिसका दस्तावेज सत्यापन तथा अन्य प्रक्रियाएं पहले ही पूरी हो चुकी थीं, उसे मान्य माना जाएगा। इसके परिणामस्वरूप करीब 100 सहायक शिक्षकों को राहत मिली है और उनकी नियुक्ति बहाल रहेगी।
मंत्री हफीजुल ने कहा कि यह निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर लिया गया है। उन्होंने कहा, “माननीय मुख्यमंत्री जी को बारंबार सलाम। आज जो निर्णय हुआ है वह शिक्षकों और डिग्री धारकों के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।










