बिहार कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में आज यानी 24 सितंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक हो रही है। बिहार की राजधानी पटना में आजादी के 85 साल बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हो रही है। जिसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री सहित कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता इसमें शिकरत करने के लिए पटना आए हैं। सबसे पहले सभी नेता कांग्रेस दफ्तर के बाहर झंडोत्तोलन किया उसके बाद बैठक शुरू हुई।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि Extended CWC के सभी सदस्यगण आज की इस बैठक में शामिल हो रहे हैं आप सभी का स्वागत है। सदाकत आश्रम स्वाधीनता आंदोलन का केंद्र बिंदु था। 1921 में स्थापित कांग्रेस का यह ऐतिहासिक दफ्तर कांग्रेस पार्टी के अनेकों महान नेताओं की कर्मस्थली रहा है। मैं आज उन्हें भी विशेष श्रद्धांजली अर्पित करता हूं। पटना में हो रही सीडब्ल्यूसी की यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण है। हम ऐसे समय में मिल रहे हैं, जबकि, अंतराष्ट्रीय और राष्ट्रीय, दोनों स्तरों पर भारत एक बेहद चुनौतीपूर्ण और चिंताजनक दौर से गुजर रहा है।
राहुल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हमारी मुसीबतें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की नाकामी और कूटनीतिक विफलता का नतीजा है। प्रधानमंत्री जिनको मेरे दोस्त बताकर ढिंढोरा पीटते हैं, वही दोस्त आज भारत को अनेकों संकट में डाल रहे हैं। आज जब हमारे वोटर लिस्ट से आधिकारिक रूप से छेड़छाड़ किया जा रहा है तो आवश्यक है कि हम लोकतंत्र की जननी बिहार में अपनी Extended CWC की मीटिंग आयोजित करके इस देश के लोकतंत्र और संविधान को बचाए रखने के अपनी प्रतिज्ञा को पुनः दोहराएं। ठीक 85 साल पहले रामगढ़ एआईसीसी सेशन में पहली बार संविधान सभा का प्रस्ताव आया था। महात्मा गांधी, पंडित नेहरु, सरदार पटेल, डॉ. अंबेडकर एवं संविधान सभा के सदस्यों ने मिलकर देश के नागरिकों ‘एक व्यक्ति – एक वोट’ का अधिकार दिया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का आधार निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव है। परंतु आज चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर ही भयंकर सवाल उठ रहे हैं। विभिन्न राज्यों में खुलासे हुए हैं, ईसी उन सवालों के जवाब देने के बजाय हम से AFFIDAVIT मांग रहा हैं। बिहार की ही तर्ज पर अब देश भर में लाखों लोगों के वोट काटने की साजिश रची जा रही है। वोट चोरी का मतलब दलित, आदिवासी, पिछड़ा, अति-पिछड़ा, अल्पसंख्यक, कमजोर और गरीब के राशन की चोरी, पेंशन चोरी, दवाई चोरी, बच्चों की Scholarship और परीक्षा की चोरी है। ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की वजह से बिहार की जनता में इसके बारे जागरूकता फैली और वो खुलकर राहुल गांधी के समर्थन में आए।
राहुल ने कहा कि महात्मा गांधी का 100 साल पुराना दिया गया ‘स्वदेशी का मंत्र’ जिसे कांग्रेस ने अंग्रेजों को परास्त करने के लिए इस्तेमाल किया, मोदी को आज याद रहा है। दूसरी तरफ चीन के लिए रेड कार्पेट सरेआम बिछाए जाते हैं। पिछले पांच वर्षों में चीन से हमारे आयात दो गुना बढ़ गया है। आज हमारा देश कई समस्याओं से जूझ रहा है। ये समस्याएं आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, सामाजिक ध्रुवीकरण और स्वायत्त संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाकर कमजोर किया जा रहा है। दो करोड़ नौकरियों का वादा अधूरा रहा। युवा रोजगार के बिना भटक रहे हैं। नोटबंदी और गलत जीएसटी ने अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार दिया। आठ वर्षों के बाद प्रधानमंत्री को अपनी गलती का एहसास हुआ। अब जीएसटी में वही सुधार लाए गए जिसकी मांग कांग्रेस पार्टी पहले दिन से कर रही थी।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी का मानना है कि देशवासियों को और अधिक खर्च करना चाहिए परंतु जब पिछले 10 वर्ष में आमदनी नहीं बढ़ी, सिर्फ महंगाई बढ़ी है तो लोग अधिक खर्च कैसे करेंगे? ग्रामीण उपभोग 50 वर्षों में सबसे कम स्तर पर है। असमानता चरम पर है। अमीर ज्यादा अमीर बन गए, गरीब और ज्यादा गरीब बन रहे हैं। प्रधानमंत्री अपने वादे के मुताबिक, किसानों की आय दोगुनी नहीं कर पाए। 2020-21 के तीन काले कानूनों की वजह से आंदोलन चला, 750 से अधिक किसान शहीद हो गए। केंद्र की मोदी सरकार के साथ -साथ अन्य राज्यों की भाजपा सरकारें भी धार्मिक ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक भावनाओं को ज्वलंत रखने के मौके तलाशती रहती हैं।
भाजपा ने जनवरी 2024 में नीतीश कुमार को फिर से समर्थन देकर बिहार में एनडीए सरकार बनाई। नीतीश सरकार ने विकास का वादा किया, लेकिन बिहार की अर्थव्यवस्था पिछड़ रही है। डबल इंजन का दावा खोखला साबित हुआ, केंद्र से कोई विशेष पैकेज नहीं मिला। बिहार में बेरोजगारी दर 15 फीसदी से ऊपर है। हर साल लाखों युवा पलायन करते हैं। भर्ती घोटाले की वजह से युवा सड़कों पर आंदोलन करके पुलिस की लाठी खाते हैं। बिहार के किसानों की हालत शायद देश में सबसे खराब है। बाढ़ के कारण हर साल लाखों लोग कोसी और गंडक नदियों से नुकसान उठाते हैं। यह इस बात का सबूत है कि बाढ़ प्रबंधन में सरकार पूरी तरह विफल रही है।










