बिहार विधानसभा चुनाव का बिगुल भले ही आधिकारिक तौर पर न बजा हो, लेकिन सियासी पारा चढ़ने लगा है। इस बार प्रचार के पारंपरिक तरीकों की जगह चुनावी वादों ने हाई-टेक रूप ले लिया है। पोस्टर-पंपलेट की जगह अब एटीएम जैसे कार्ड और चेकबुक जैसे कूपन वोटरों के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं।
प्रशांत किशोर की नई पार्टी जनसुराज ने पहली बार चुनावी मैदान में उतरते हुए PLC परिवार लाभ कार्ड’ लॉन्च किया है। पार्टी का दावा है कि इस कार्ड के ज़रिए हर परिवार को पांच योजनाओं के तहत हर महीने 20 हजार रुपये तक का लाभ मिलेगा। इनमें रोजगार गारंटी, बुजुर्गों को पेंशन, सस्ता कर्ज, बच्चों की शिक्षा और खेती-मजदूरी से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं।
जनसुराज चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष किशोर कुमार कहते हैं, अब जनता से वादे सीधे कार्ड के जरिए किए जा रहे हैं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
कांग्रेस ने भी चुनावी रणनीति में नया मोड़ लेते हुए चेकबुक जैसे कूपन बांटना शुरू किया है। पार्टी का वादा है कि इससे सालाना 28 लाख रुपये तक का लाभ परिवारों को मिल सकता है। घोषणाओं में शामिल हैं 25 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज, महिलाओं को 2500 रुपये मासिक सहायता, मुफ्त टैबलेट, 200 यूनिट मुफ्त बिजली, पेंशन बढ़ोतरी और भूमिहीनों को जमीन।
पार्टी प्रवक्ता ज्ञान रंजन का कहना है, जनता अब एनडीए की नाकामी से तंग आ चुकी है, और ये कूपन उनके अधिकारों का प्रतीक बनेंगे।
जनसुराज और कांग्रेस की इन घोषणाओं पर भाजपा ने तीखा हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि ये सिर्फ चुनावी स्टंट हैं। कांग्रेस पहले ही देश को धोखा दे चुकी है और अब प्रशांत किशोर उसी राह पर चल पड़े हैं। दोनों दल जनता को भ्रमित कर रहे हैं।
इधर, एनडीए सरकार पहले ही महिला रोजगार योजना के तहत रुपये 10,000 की सीधी नकद सहायता की योजना को अंतिम रूप दे चुकी है। माना जा रहा है कि यह योजना चुनावी मैदान में एनडीए का सबसे प्रभावी हथियार साबित हो सकती है।
बिहार में अब चुनावी लड़ाई नारे और रैलियों से आगे बढ़कर ATM कार्ड बनाम चेकबुक कूपन की हो चुकी है। सियासी दल करोड़ों के वादों के साथ मैदान में हैं, लेकिन असली फैसला जनता के हाथ में है कौन-सा कार्ड वोट में बदलेगा, यही देखना दिलचस्प होगा।










