जमशेदपुर शहर के पॉश इलाके गोलमुरी स्थित केनरा बैंक की शाखा में हुई देश की सबसे बड़ी बैंक डकैतियों में शुमार इस दुस्साहसिक वारदात को 16 दिन बीत चुके हैं. इसके बावजूद पुलिस के हाथ खाली हैं, जो उसकी कार्यशैली पर कई सवाल खड़े करते हैं. झारखंड पुलिस की एसआइटी और अन्य जांच एजेंसियों ने तकनीकी अनुसंधान के आधार पर डकैतों के चेहरे बेनकाब कर दिये हैं, लेकिन अपराधियों की पेशेवर अंदाज के कारण पुलिस अब तक उन तक नहीं पहुंच पायी है.
मामले में भौतिक साक्ष्यों के साथ ही तकनीकी सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलिजेंस के भी इस्तेमाल किये जा रहे हैं. चार आइपीएस अधिकारियों के नेतृत्व में 20 डीएसपी, इंस्पेक्टर व थानेदार स्तर के तेज-तराँर अधिकारी और 10 विशेषज्ञों की टेक्निकल टीम दिन-रात डकैतों की तलाश में जुटी हैं, इसके बावजूद एसआइटी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पायी है. अब तक सुराग ही तलाश रही है.
रेकी और ठहरने के ठिकाने
जांच में यह बात सामने आयी है कि वारदात को अंजाम देने से पहले इन शातिर अपराधियों ने शहर के अलग-अलग होटलों और लॉजों में छिपकर लंबे समय तक बैंक की रेकी की थी. साकची के टीना शेड इलाके के एक लॉज में भी एक अपराधी के ठहरने की पुष्टि हुई है. इससे साफ होता है कि बदमाशों ने स्थानीय मददगारों की मदद से शहर की भौगोलिक स्थिति की पूरी जानकारी जुटायी थी.
गौसम और साधनों का सटीक इस्तेमाल
घटना के दिन मूसलाधार बारिश हो रही थी. अपराधियों ने इसका पूरा फायदा उठाया. रेनकोट पहनकर बैंक के अंदर घुसे, ताकि सीसीटीवी फुटेज या चश्मदीदों द्वारा उनके हुलिये को आसानी से पहचाना न जा सके. मात्र कुछ ही मिनटों में हथियार के बल पर बैंककर्मियों को बंधक बना आयरन सेफ और लॉकर से लगभग 23 किलो सोने के आभूषण और 43 लाख रुपये नकद लूट लिये गये.
अंतरराज्यीय दबिश : पुलिस ने बिहार के समस्तीपुर, पटना, पूर्वी चंपारण और पश्चिम बंगाल के वर्धमान में ताबड़तोड़ छापेमारी की. इसके अलावा ओडिशा और नेपाल सीमा तक संभावित ठिकानों और मार्गों के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच की जा रही है.
दो-दो लाख के इनाम
पुलिस ने शिनाख्त किये गये पांचों आरोपियों दर्शन कुमार उर्फ प्रियदर्शी (समस्तीपुर), अक्षय कुमार उर्फ साका (पटना), अमन सिंह (वर्धमान), ऋतिक कुमार (पूर्वी चंपारण) और एक अन्य पर दो-दो लाख रुपये (कुल 10 लाख रुपये) का इनाम घोषित किया है. टावर डंप और कॉल डिटेल एनालिसिस घटना के समय और उसके आसपास गोलमुरी बैंक क्षेत्र में एक्टिव रहे मोबाइल टावरों के डेटा को खंगाला गया है. पुलिस ने संदिग्धों द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले संभावित मोबाइल नंबरों और उनके इंटर स्टेट संपर्कों की सूची तैयार कर ली है.
100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की मैपिंग
पुलिस ने वारदात स्थल से लेकर अपराधियों के भागने के संभावित रास्तों परसुडीह, सुंदरनगर, पोटका और ओडिशा बॉर्डर तक के 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं. फुटेज में अपराधियों के मूवमेंट, उनके हुलिये और उनके द्वारा इस्तेमाल की गयीं बाइकों के नंबर प्लेट्स की तकनीकी जांच की जा रही है. वीडियो और टैटू के जरिये पहचान पुलिस ने अपराधियों के वीडियो सार्वजनिक करने के साथ ही व्यापक प्रचार किया है. विशेष तौर पर आरोपी अमन सिंह के शरीर पर बने विशिष्ट टैटू को पहचान का मुख्य आधार बनाया गया है, ताकि उसकी पहचान की जा सके.
बैंक सुरक्षा मानकों में बड़ी चूक
इस दुस्साहसिक वारदात ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. जांच में सुरक्षा से जुड़ी कई गंभीर लापरवाहियां सामने आयी हैं.
सशस्त्र गार्ड की निष्क्रियता या कभी: घटना के वक्त बैंक का सुरक्षा गार्ड विरोध करने पर घायल हुआ, लेकिन शातिर अपराधियों ने जिस तरह बैंक खुलते ही (महज सुबह 9:10 बजे) धावा बोला, उससे स्पष्ट है कि शुरुआती घंटों में बैंक की सुरक्षा मानक ढीले थे.
अलार्म सिस्टम और त्वरित प्रतिक्रिया का अभाव : बैंक के भीतर लगभग एक घंटे तक डकैत तांडव मचाते रहे, सेफ और लॉकर की चाचियां लेकर 600 से अधिक पैकेट सोना और नकदी बोरियों व पिट्ठ बैग में भरते रहे, लेकिन इस दौरान कोई भी साइलेंट सायरन या पुलिस कंट्रोल रूम को ऑटोमैटिक अलर्ट जाने वाला सिस्टम सक्रिय नहीं हो सका.
स्टाफ की सुरक्षा प्रोटोकॉल
सफाईकर्मियों और दैनिक कर्मचारियों द्वारा बैंक के मुख्य दरवाजे खोलने के दौरान बाहरी गतिविधियों पर निगरानी रखने का कोई पुख्ता मेकैनिज्म नहीं था, जिसका फायदा उठाकर अपराधी आसानी से अंदर घुस गये.
सुबोध सिंह गिरोह का सिंडिकेट
राजस्थान से ओडिशा तक फैला है जाल इन्वेस्टिगेशन में यह भी खुलासा हुआ है कि ये सभी अपराधी कुख्यात अंतरराज्यीय सुबोध सिंह गिरोह के सक्रिय गुर्गे हैं. यह गिरोह देश के कई राज्यों जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में इसी अंदाज में बैंकों में डकैती डालता है.
वारदात को अंजाम देने के बाद ये शातिर अपराधी आमतौर पर मोटरसाइकिल या सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कर अलग-अलग राज्यों की सीमाओं को पार कर जाते हैं. इस बार भी घटना के तुरंत बाद अपराधी परसुडीह और सुंदरनगर के रास्ते पोटका होते हुए ओडिशा की तरफ फरार हुए.










