JPSC Exam Scam: जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में गड़बड़ी की जांच कर रही सीआइडी को कई चौकाने वाली जानकारी मिल रही है, जिनका उल्लेख केश डायरी में किया गया है. टीडीपीएल कंपनी का निदेशक रामवीर सिंह भी पूर्व में एक परीक्षार्थी रहा है. वह दारोगा बनना चाहता था. इसके लिए उसने तैयारी की और साल 2005 में उत्तर प्रदेश पुलिस कमीशन की परीक्षा में बैठा. पीटी में सफल रहा. मुख्य परीक्षा में असफल रहने के कारण दारोगा नहीं बन पाया. लेकिन बाद में उसने टीडीपीएल कंपनी बनायी और फर्जीवाड़े से कई लोगों को अफसर बनवा दिया.
2010 में कंपनी बनाई, 2023 में झारखंड में सिंडिकेट से जुड़ा
रामवीर सिंह ने साल 2010 में सत्यपाल सिंह और मो तारिक के साथ मिलकर टीडीपीएल कंपनी बनायी. इससे शेयर बाजार के कुछ काम, आधार कार्ड से जुड़े कुछ छोटे मोटे काम करने लगा. साल 2014 में मो तारिब ने कंपनी छोड़ दी. इसके बाद साल 2023 में अभय तिवारी से उसका संपर्क हुआ और झारखंड में उसकी इंट्री हुई. इसके बाद उसने अभय तिवारी, धर्मेन्द्र और जेपीएससी अध्यक्ष तथा जेएसएससी में काम करने वाली दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर सिंडिकेट बना लिया.
अभ्यर्थियों से पैसे लेकर परीक्षाओं में कराया सफल
जांच में यह बात सामने आयी है कि इसी सिंडिकेट ने बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की तलाश की, उनसे पैसे लिए और फर्जीवाड़ा कर उन्हें परीक्षाओं में सफल करा दिया. भर्ती घोटाले में गिरफ्तार मो उस्मान कंप्यूटर का एक्सपर्ट है. उसने साल 2010 में बरेली से एडवांस डिप्लोमा हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग इंजीनियरिंग में डिग्री ली है. कुछ दिनों तक दूसरी कंपनियों में काम करने के बाद साल 2017 में अपनी कंपनी बनायी. इसमें उसका सहयोगी हेमंत कुमार वर्मा था. मुख्यालय लखनऊ में था. जब यह कंपनी यूपी की विस नियुक्तियों के मामले में काम कर रही थी, तब 2020 में उसका संपर्क टीडीपीएल के साथ हुआ और वह झारखंड आ गया. अभय तिवारी सिंडिकेट का हिस्सा बना और उसने भी कई अभ्यर्थियों को सफल कराया.










