अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आईसीएआर–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB), रांची ने आशा फाउंडेशन, नामकुम के सहयोग से सभय बागान स्कूल मैदान, नामकुम में कार्यक्रम आयोजित किया। इस आयोजन में स्थानीय समुदाय की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। आसपास के गांवों से आई एक हजार से अधिक आदिवासी महिलाएं, बच्चे और ग्रामीण इसमें शामिल हुए। कार्यक्रम महिलाओं के योगदान, उपलब्धियों और सशक्तिकरण के उत्सव के रूप में मनाया गया।
कार्यक्रम में पद्मश्री से सम्मानित लोकगायक मधु मंसूरी हसमुख मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि महिलाएं परिवार की रीढ़ होती हैं और समाज में सामंजस्य, स्थिरता तथा सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
स्त्री रोग विशेषज्ञ और समाजसेवी डॉ. गीता गुप्ता ने महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाएं परिवार की मुख्य देखभाल करने वाली होती हैं और उचित स्वास्थ्य आदतों, स्वच्छता तथा पोषण के प्रति जागरूकता से परिवार के स्वास्थ्य और कल्याण को बेहतर बनाया जा सकता है।
आईसीएआर–IIAB के संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) डॉ. के. के. कृष्णानी ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि खेतों में होने वाले करीब 60 से 70 प्रतिशत कार्य महिलाएं करती हैं। उन्होंने कहा कि महिला किसानों को ज्ञान, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाना ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और सतत कृषि विकास के लिए आवश्यक है।
डॉ. अरुणिता रक्षित ने महिलाओं की प्रेरणादायक कहानियां साझा करते हुए पद्मश्री सम्मानित पर्यावरण कार्यकर्ता चामी मुर्मू का उल्लेख किया, जिन्होंने देशभर में 25 लाख से अधिक पेड़ लगाने का कार्य किया है। साथ ही उन्होंने झारखंड की पद्मश्री सम्मानित चुटनी महतो (चुटनी देवी) की कहानी भी साझा की, जिन्होंने ‘डायन’ करार दिए जाने की पीड़ा झेलने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में डायन प्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाने का काम शुरू किया है।
नोडल अधिकारी (TSP) डॉ. खेलाराम सोरेन ने ग्रामीण आजीविका में कृषि की भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि ICAR-IIAB विविधीकृत कृषि गतिविधियों के माध्यम से किसानों, विशेषकर आदिवासी महिलाओं, की आय और जीवन स्तर सुधारने के लिए काम कर रहा है।
आशा फाउंडेशन के संस्थापक अजय जायसवाल ने आदिवासी ग्रामीण परिवारों में महिलाओं के सशक्तिकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संस्थान के साथ सहयोगात्मक प्रयासों के लिए ICAR-IIAB का आभार जताया। वहीं पूनम टोप्पो ने महिलाओं के अधिकारों पर अपने विचार साझा करते हुए आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर डॉ. जयंता लायक ने समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) की जानकारी देते हुए बताया कि फसल, पशुपालन, मत्स्य और कुक्कुट पालन को एकीकृत कर किसानों की आय के विभिन्न स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।
डॉ. मदन कुमार ने किसानों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं जैसे पीएम-कुसुम योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की जानकारी दी और महिला किसानों को इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। वहीं डॉ. सौमजीत सरकार ने बत्तख पालन के लाभ बताते हुए कहा कि खाकी कैम्पबेल नस्ल की बत्तखें अधिक अंडा उत्पादन के लिए जानी जाती हैं और यह किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर माध्यम बन सकती हैं। उन्होंने छोटे पशु और पक्षी पालन में महिलाओं की अहम भूमिका पर भी जोर दिया।









