फरिश्ता शब्द से हर कोई परिचित है, लेकिन कई बार जीवन की कठिन परिस्थितियों में लोगों को सचमुच किसी फरिश्ते के आने का एहसास होता है। झारखंड की राजधानी रांची में ऐसा ही एक फरिश्ता इन दिनों मानवता और संवेदनशीलता की नई मिसाल पेश कर रहा है। डीपीएस रांची के केमिस्ट्री शिक्षक डॉ. अमरदीप सिन्हा ने समाज सेवा की एक अनूठी पहल करते हुए शहर में निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा की शुरुआत की है।
इस सेवा का उद्देश्य उन जरूरतमंद मरीजों की मदद करना है, जो आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी या अचानक आई आपात स्थिति के कारण समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। कई बार गरीब परिवारों के पास एम्बुलेंस का किराया तक देने के पैसे नहीं होते। ऐसे हालात में डॉ. सिन्हा की यह सेवा मरीजों और उनके परिजनों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है।
डॉ. अमरदीप सिन्हा ने न्यूज़ फ्रेम से बातचीत में बताया कि वे स्वयं शिक्षक हैं और उनकी पत्नी भी शिक्षण क्षेत्र से जुड़ी हैं। दोनों की आय अच्छी है और परिवार का जीवन सहज रूप से चल रहा है। उन्होंने कहा, कोरोना महामारी के दौरान हमने देखा कि किस तरह लोग संसाधनों के अभाव में अपनी जान गंवा रहे थे। उसी समय यह विचार आया कि पढ़ाने के अलावा समाज के लिए भी कुछ अलग और प्रेरणादायक किया जाए।
उन्होंने बताया कि डीपीएस रांची में उनके दस वर्ष पूरे हो चुके हैं और वरिष्ठ पीजीटी बनने के बाद वेतन में वृद्धि हुई। ऐसे में उन्होंने अपने वेतन का एक हिस्सा समाज सेवा के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया और अपनी निजी गाड़ी को एम्बुलेंस में परिवर्तित कर निःशुल्क सेवा शुरू की।
जब उनसे पूछा गया कि स्कूल समय के दौरान आने वाली आपात कॉल्स का वे कैसे प्रबंधन करते हैं, तो डॉ. सिन्हा ने बताया कि ऐसे समय में उनका ड्राइवर मरीज को अस्पताल पहुंचाने का काम करता है। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार शव वाहन के लिए भी कॉल आते हैं, लेकिन फिलहाल इस सेवा में वे मदद नहीं कर पाते। इसी को देखते हुए उन्होंने निर्णय लिया है कि जल्द ही एक और वाहन खरीदा जाएगा, जिसे विशेष रूप से अंतिम यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
डॉ. अमरदीप सिन्हा की यह पहल कई लोगों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। उनका स्पष्ट कहना है कि पैसों की कमी के कारण किसी की जान न जाए, यही उनकी सबसे बड़ी मंशा है। शिक्षण क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के साथ-साथ समाज के प्रति निभाई जा रही यह जिम्मेदारी युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।
रांची शहर के लोग डॉ. सिन्हा की इस पहल की जमकर सराहना कर रहे हैं। जिस तरह वे जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं, उससे यह साफ झलकता है कि उनके नाम में शामिल दीप शब्द की तरह वे वास्तव में कई जिंदगियों में उम्मीद और मानवता का उजाला जला रहे हैं।
रांची से आशका पटेल की रिपोर्ट










