4300 करोड़ की देनदारी में डूबा एचइसी- केंद्र ने मांगा अपडेटेड नोट, बंदी की तैयारी?

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हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचइसी) को लेकर केंद्र सरकार स्तर पर हलचल तेज हो गयी है. पिछले 13 नवंबर को कमेटी ऑफ ग्रुप ऑफ ऑफिसर्स (सीजीओ) की बैठक में एचइसी को बंद करने की सिफारिश की गयी थी. इसी के आधार पर वित्त मंत्रालय ने भारी उद्योग मंत्रालय से एनेक्सर-2 के अनुसार अपडेटेड बैकग्राउंड नोट तैयार कर तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है. ये निर्देश 20 नवंबर 2025 को जारी मंत्रालयिक पत्र में उल्लेखित हैं. साथ ही मंत्रालय ने यह भी सुझाव दिया है कि इस प्रक्रिया में डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेज से मदद ली जाए.

एचइसी की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. कंपनी का घाटा और देनदारी हर साल बढ़ते हुए अब लगभग 4300 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. 31 मार्च 2025 तक एचइसी की कुल वित्तीय देनदारी 2067 करोड़ दर्ज की गयी, जबकि कार्यशील पूंजी पूरी तरह खत्म हो चुकी है और यह माइनस 1594 करोड़ तक जा चुकी है. कंपनी की नेटवर्थ भी नेगेटिव में है.

वित्तीय संकट का असर इतना गहरा है कि कंपनी कर्मचारियों को नियमित वेतन तक नहीं दे पा रही. साथ ही कच्चे माल की खरीदारी भी बाधित हो गई है.

भारतीय मजदूर संघ से जुड़े सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी राष्ट्रीय परिसंघ की तीन दिवसीय बैठक दिल्ली में संपन्न हुई. इसमें देशभर की 72 यूनिटों से 150 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. एचइसी की ओर से रमा शंकर प्रसाद और रविकांत शामिल हुए.

बैठक में सभी पीएसयू की स्थिति पर चर्चा हुई और एचइसी के मामले को विशेष प्राथमिकता देते हुए एक अलग कमेटी गठित की गई। यह कमेटी जल्द ही संबंधित मंत्रियों से मुलाकात कर समाधान तलाशने की कोशिश करेगी।

इस दौरान बीएमएस नेताओं ने रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ के साथ लगभग दो घंटे तक बैठक की और एचइसी की स्थिति, बकाया वेतन और पुनरुद्धार की संभावनाओं पर विस्तृत बातचीत की. मंत्री ने जल्द ही इस पर एक और बैठक बुलाने का आश्वासन दिया.

दूसरी ओर एचइसी के सीएमडी केएस मूर्ति ने उत्पादन न रुकने देने की प्रतिबद्धता जताई है. नयी दिल्ली के भेल मुख्यालय में हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन के महामंत्री लीलाधर सिंह से बातचीत में उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में मशीनें बंद नहीं होने दी जाएंगी.

सीएमडी ने साफ कहा कि एचइसी का एकमात्र रास्ता स्वावलंबन है. जब तक उत्पादन इतना नहीं बढ़ जाता कि संस्था अपने कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन स्वयं दे सके, तब तक अन्य मांगों को पूरा करना संभव नहीं होगा.

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