अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी-भरकम आयात शुल्क (Import Duty) को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में अब एक नया मोड़ आ गया है. न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत ने आदेश दिया है कि जिन कंपनियों ने ‘ट्रंप टैरिफ’ के नाम पर सरकार को टैक्स दिया था, वे अब अपना पैसा वापस यानी रिफंड (Refund) पाने की हकदार हैं. इस फैसले को ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी कानूनी हार के रूप में देखा जा रहा है.
क्या है पूरा मामला ?
पिछले साल राष्ट्रपति रहते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने ‘अंतरराष्ट्रीय आपातकाल आर्थिक शक्ति कानून’ (IEEPA) का इस्तेमाल करते हुए कई आयातित चीजों पर भारी टैक्स लगा दिया था. उनका तर्क था कि देश में आर्थिक आपातकाल जैसी स्थिति है और अमेरिकी उद्योगों को बचाने के लिए यह जरूरी है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द किया था टैक्स ?
बीती 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इन करों को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए रद्द कर दिया था. कोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रपति अपनी मर्जी से अकेले टैक्स नहीं थोप सकते. अमेरिका में टैक्स लगाने या बदलने की असली शक्ति ‘कांग्रेस’ (वहां की संसद) के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास.
अब कंपनियों को क्या फायदा होगा ?
सुप्रीम कोर्ट ने टैक्स रद्द कर दिया था, लेकिन यह साफ नहीं था कि जो पैसा कंपनियां पहले ही सरकार को दे चुकी हैं, उसका क्या होगा. बुधवार को न्यायाधीश रिचर्ड ईटन ने इस पर स्थिति साफ कर दी. उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सभी आयातक (Importing Companies) सुप्रीम कोर्ट के फैसले का लाभ उठा सकेंगे.
जिन भी कंपनियों ने इस कानून के तहत शुल्क चुकाया है, उन्हें सरकार को वह पैसा लौटाना होगा. यह फैसला उन हजारों कंपनियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जिन्होंने पिछले साल करोड़ों डॉलर टैक्स के रूप में चुकाए थे. अब रिफंड की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे अमेरिकी बाजार में नकदी बढ़ेगी.










