335वीं रथ यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब, 10 साल में पहली बार रथ यात्रा के दिन नहीं बरसे मेघ

Share this News:

रांची में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मुख्य मंदिर से निकलकर भक्तों के बीच पहुंचे. इसके बाद पूरे ब्रह्मांड का संचालन करने वाले भगवान के रथ की डोर डेढ़ लाख भक्तों ने थामी और गगनभेदी नारों के बीच दो घंटे में उन्हें मुख्य मंदिर से मौसीबाड़ी पहुंचाया. इस बार रथ संचालन के दौरान बारिश नहीं हुई. रथ यात्रा के दिन बारिश को शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन बारिश होने से खेती अच्छी होती है. लेकिन इस वर्ष रथ यात्रा के दिन बारिश नहीं हुई. रांची के पिछले 10 वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो रथ यात्रा के दिन लगभग हर वर्ष छिटपुट से मध्यम दर्जे की बारिश हुई है. 10 वर्षों में यह पहली बार है, जब बिल्कुल बारिश नहीं हुई.

रथ यात्रा के दिन बारिश की स्थिति
2026 (16 जुलाई) : मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया था, लेकिन बारिश नहीं हुई.
2025 (27 जून) : रथ यात्रा के दिन छिटपुट बारिश हुई.
2024 (07 जुलाई) : शहर में पूरे दिन रुक-रुक कर फुहारें पड़ीं और हल्की बारिश हुई. कुल 2.9 मिमी बारिश दर्ज की गयी.
2023 (20 जून) : मॉनसून की दस्तक के साथ दोपहर में हल्की वर्षा हुई.
2022 (01 जुलाई) : शाम में गरज के साथ बादल बरसे और 15 मिमी बारिश हुई.
2021 (12 जुलाई) : पूरे दिन बारिश होती रही. लगभग 71 मिमी बारिश हुई. हालांकि, कोरोना के चलते रथ यात्रा नहीं निकली थी.
2020 (23 जून) : इस दिन लगभग 50 मिमी बारिश हुई. हालांकि, कोरोना के चलते रथ यात्रा नहीं निकली थी.
2019 (04 जुलाई) : रथ यात्रा के दिन शाम के समय लगभग आधे घंटे तक 10 मिमी बारिश हुई.
2018 (14 जुलाई) : इस दिन मौसम काफी सुहावना रहा और दोपहर में मध्यम दर्जे की बारिश हुई.
2017 (25 जून) : रथ यात्रा के दिन तेज धूप और उमस रही, लेकिन देर शाम हल्की बारिश हुई.

335 साल पुराना है इस रथ यात्रा का इतिहास, आज भी परंपरा कायम
रांची में भगवान जगन्नाथ की 335वीं रथ यात्रा गुरुवार को निकाली गयी. इसकी शुरुआत वर्ष 1691 में नागवंशी शासक अनिनाथ शाहदेव ने की थी. उन्होंने पुरी के जगन्नाथ मंदिर से प्रेरित होकर इसकी शुरुआत की थी. जगन्नाथपुर मंदिर की स्थापत्य शैली और धार्मिक परंपराएं पुरी के जगन्नाथ मंदिर से मिलती-जुलती हैं. इन परंपराओं में आज तक कोई बदलाव नहीं हुआ है. 335 साल के इतिहास में केवल दो बार, वर्ष 2020 और 2021 में, कोरोना महामारी के चलते रथ यात्रा स्थगित की गयी थी. उन वर्षों में मंदिर के गर्भगृह में ही भगवान की पूजा-अर्चना की गयी थी.

सीएम की घोषणा : मंदिर मार्ग पर बनेगा तोरण द्वार
सीएम हेमंत सोरेन भी यात्रा में शामिल हुए. उन्होंने मौके पर कहा कि जगन्नाथपुर मंदिर की भव्यता को और बड़ी पहचान दिलायी जायेगी. मंदिर की दूर से ही पहचान हो, इसके लिए राज्य सरकार मंदिर को जोड़ने वाली सड़क पर तोरण द्वार बनवायेगी. यह तोरण द्वार नयासराय रिंग रोड के पास बनेगा. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस यात्रा को और भव्य बनाया जायेगा. रथ यात्रा में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार भी शामिल हुए. रथ से नीचे उतरने के दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया. उन्हें तत्काल सहारा देकर सुरक्षित उतारा गया. इसके बाद मुख्यमंत्री समेत अन्य लोगों को भी सुरक्षा के साथ नीचे उतारा गया.

Share this News:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *