लातेहार कोलियरी हमले के बाद दूसरी वारदात की तैयारी? NIA ने कोर्ट में खोले राज

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रांचीः लातेहार के तेतरियाखाड़ कोलियरी में फायरिंग, आगजनी और बम विस्फोट के बाद भी अमन साहू और सुजीत सिन्हा (दोनो अब मृत) से जुड़े कथित गिरोह की गतिविधियां थमने वाली नहीं थीं. एनआईए ने अदालत के सामने दावा किया है कि तेतरियाखाड़ की घटना के बाद गिरोह एक और हमले की तैयारी में जुटा था. लेकिन हमले से पहले पुलिस ने अपराधियो को गिरफ्तार करते हुए हथियार बरामद कर लिए थे.

रंगदारी वसूलने का था प्लान

एनआईए के अनुसार, दोबारा कथित हमले के लिए हथियार और गोलियां जुटाई गई थीं. जांच एजेंसी के अनुसार, सैफ अंसारी उर्फ मोहम्मद सैफ अली उर्फ बबलू को एक कार्बाइन, एक पिस्तौल और गोला-बारूद उपलब्ध कराए गए थे. सैफ को अजय तुरी और पंकज करमाली के साथ मिलकर आगे की कार्रवाई करनी थी.

हालांकि, इससे पहले बड़कागांव पुलिस ने हथियारों के साथ उसकी कथित भूमिका को लेकर कार्रवाई की और हथियारों की बरामदगी कर ली, जिसके चलते हमला टल गया. रांची की विशेष एनआईए अदालत के 16 सितंबर 2026 के आदेश में जांच एजेंसी के इन आरोपों का विस्तार से उल्लेख है. अदालत में एनआईए ने कहा कि सैफ अंसारी की भूमिका केवल 18 दिसंबर 2020 को लातेहार की तेतरियाखाड़ कोलियरी में हुए हमले तक सीमित नहीं थी. एजेंसी के अनुसार, जांच में एक अन्य हमले की तैयारी और उसके लिए हथियारों की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आई.

अमन साहू के निर्देश पर हथियार जुटाने का आरोप

एनआईए ने अदालत को बताया कि अमन साहू (अब मृत) के निर्देश पर शाहरुख अंसारी के माध्यम से दूसरे हमले के लिए हथियारों की व्यवस्था की गई थी. एजेंसी के अनुसार, सैफ अंसारी को वसीम अंसारी से कानभीटा गांव में एक कार्बाइन, एक पिस्तौल और गोलियां मिली थीं. जांच एजेंसी का आरोप है कि सैफ अंसारी को ये हथियार अजय तुरी और पंकज करमाली उर्फ खेतिया के साथ मिलकर एक अन्य हमले को अंजाम देने के उद्देश्य से उपलब्ध कराए गए थे.

बड़कागांव पुलिस की कार्रवाई से खुली हथियारों की कड़ी

एनआईए के अनुसार, सैफ अंसारी के पास हथियार पहुंचने के बाद बड़कागांव पुलिस ने कार्रवाई की और हथियार तथा गोला-बारूद बरामद किए. इस बरामदगी के संबंध में बड़कागांव थाना कांड संख्या 44/2021, दिनांक 9 फरवरी 2021 दर्ज किए जाने का उल्लेख विशेष एनआईए अदालत के आदेश में है. जांच एजेंसी ने अदालत में इस बरामदगी को सैफ अंसारी की कथित आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया.

पहले हमले में चार ट्रक जलाए गए थे, चार नागरिक हुए थे घायल

जिस गिरोह पर दूसरे हमले की तैयारी का आरोप है, उससे जुड़ी जांच की प्रमुख कड़ी 18 दिसंबर 2020 को हुई तेतरियाखाड़ कोलियरी की घटना है. लातेहार जिला के बालूमाथ थाना क्षेत्र में स्थित कोलियरी के चेकपोस्ट नंबर-1 के पास उस शाम फायरिंग और आगजनी हुई थी.

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, शाम करीब सात बजे वारदात की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची थी. वहां पुलिस दल पर भी गोलीबारी किए जाने का आरोप है. इस घटना में चार ट्रक और एक मोटरसाइकिल जला दी गई थी तथा चार नागरिक घायल हुए थे. घटनास्थल से कारतूस, बम के अवशेष और कोयला कंपनियों तथा ट्रांसपोर्टरों को धमकी देने वाले हस्तलिखित पर्चे बरामद किए गए थे.

एनआईए का आरोप है कि इस हमले का मकसद कोयला कारोबार से जुड़े लोगों में भय पैदा करना और उनसे रंगदारी वसूलने के लिए दबाव बनाना था. एजेंसी ने सुजीत सिन्हा और अमन साहू (दोनों अब मृत)से जुड़े कथित नेटवर्क की भूमिका की जांच करते हुए कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया.

हमले से पहले धोटी गांव में जुटने का भी आरोप

एनआईए की जांच के अनुसार, तेतरियाखाड़ में हमला अचानक नहीं हुआ था. एजेंसी के अनुसार सैफ अंसारी, अजय तुरी और पंकज करमाली 17 दिसंबर 2020 को धोटी गांव पहुंचे थे, जहां हथियारबंद समूह के सदस्यों ने कथित तौर पर हमले की योजना तैयार की थी.

अदालत के आदेश में दर्ज जांच के तथ्यों के मुताबिक, समूह कोलियरी के आसपास रहा और अगले दिन वारदात को अंजाम दिया गया. एनआईए ने इसे हमले की पूर्व तैयारी से जोड़ते हुए आरोपियों की भूमिका का उल्लेख किया है. जांच एजेंसी के मुताबिक, वारदात के बाद हथियारों को गिरोह के दूसरे सदस्यों को सौंपने की बात भी सामने आई. इसके बाद हथियारों की आपूर्ति और एक अन्य हमले की तैयारी से जुड़े आरोप जांच का हिस्सा बने.

जेल से साजिश रचने का आरोप

एनआईए की जांच के अनुसार, सुजीत सिन्हा और अमन साहू (दोनों अब मृत) अलग-अलग जेलों में बंद रहने के दौरान कथित तौर पर अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कोयला कारोबार से जुड़े लोगों को डराने और उनसे रंगदारी वसूलने की साजिश में शामिल थे. जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस नेटवर्क का उद्देश्य सीसीएल, कोयला ट्रांसपोर्टरों, ठेकेदारों, डीओ होल्डरों और कोयला कारोबार से जुड़े अन्य लोगों पर दबाव बनाकर अवैध वसूली करना था. जांच में प्रदीप गंझू उर्फ प्रेम उर्फ मंडल समेत कई अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है. एनआईए के मुताबिक, टेटरियाखाड़ कोलियरी में हमले को अंजाम देने के लिए अलग-अलग लोगों की भूमिका तय की गई थी.

गवाहों की पहचान और डिजिटल साक्ष्यों का भी हवाला

सैफ अंसारी की कथित भूमिका को लेकर एनआईए ने अदालत में कई तरह के साक्ष्यों का हवाला दिया. इनमें संरक्षित गवाहों के बयान, फोटो पहचान प्रक्रिया, मोबाइल फोन से निकाला गया डेटा और ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं. अदालत के आदेश के अनुसार, संरक्षित गवाहों ए, बी, डी और ई ने फोटो पहचान प्रक्रिया के दौरान सैफ अंसारी तथा कुछ अन्य आरोपियों की तस्वीरों की पहचान की थी. एनआईए का दावा है कि मोबाइल फोन से मिले डेटा और ऑडियो रिकॉर्डिंग से सैफ अंसारी, अमन साहू, शाहरुख अंसारी, प्रदीप गंझू और अन्य आरोपियों के बीच संपर्क तथा कथित आपराधिक साजिश के संबंध में जानकारी मिली.

26 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र, मुकदमे में 345 गवाह

एनआईए ने इस मामले में कुल 26 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल किए हैं. आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, हत्या के प्रयास, आगजनी, रंगदारी, हथियारों और विस्फोटकों से जुड़े अपराधों तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं. इसी मामले में सैफ अंसारी की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी थी. एनआईए ने उसके खिलाफ लगे आरोपों के समर्थन में गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्य और हथियारों की बरामदगी का उल्लेख किया था.

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