झारखंड के पारा शिक्षकों (सहायक अध्यापकों) की बहुप्रतीक्षित मांग पर बुधवार को राज्य सरकार के साथ हुई वार्ता में फिलहाल कोई राहत की खबर नहीं निकल पाई है. नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की मौजूदगी में हुई. इस बैठक में स्पष्ट कर दिया गया है कि ‘आकलन परीक्षा’ को ‘झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा’ (JTET) के समतुल्य मान्यता देने की मांग फिलहाल पूरी नहीं की जा सकेगी. विभाग का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य किया है, इसलिए बिना कानूनी स्पष्टता के इसे स्वीकार करना संभव नहीं है.
अगले सप्ताह तक अंतिम फैसला संभव
शिक्षा विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने संघ प्रतिनिधियों को बताया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा निर्देशों का पालन करना विभाग की बाध्यता है. हालांकि, सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस पर अगले सप्ताह तक कोई अंतिम कानूनी राय सामने आ सकती है, जिसके बाद ही सरकार पुनर्विचार करेगी. संघ की ओर से ऋषिकांत तिवारी, दिलशाद अहमद, विकास कुमार चौधरी सहित अन्य प्रतिनिधियों ने अपनी बात मजबूती से रखी.
आश्रितों के लिए अच्छी खबर, उम्र सीमा पर पेच
बैठक के दौरान एक सकारात्मक पहल यह रही कि राज्य के मृत पारा शिक्षकों के आश्रितों को अनुकंपा पर नौकरी देने की प्रक्रिया में तेजी आएगी. इसके लिए आवश्यक प्रस्ताव जल्द ही राज्य कैबिनेट को भेजा जाएगा. वहीं, दूसरी ओर, शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा बढ़ाकर 62 वर्ष करने की मांग को फिलहाल सरकार ने स्वीकार नहीं किया है. इस मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन पाई.
बर्खास्त शिक्षकों की सेवा वापसी पर फिर होगी वार्ता
झारखंड के 967 बर्खास्त पारा शिक्षकों का मामला भी बैठक में छाया रहा. उनकी सेवा बहाली को लेकर संघ को यह निर्देश दिया गया है कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज लेकर विभाग के समक्ष आएं, ताकि उन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सके. इसके अलावा, वर्ष 2024 में मानदेय में एक हजार रुपये की बढ़ोतरी की जो सहमति बनी थी, उस पर भी मुख्यमंत्री के समक्ष चर्चा करने का आश्वासन दिया गया है. फिलहाल, आकलन परीक्षा सफल शिक्षक अब अगली कानूनी प्रतिक्रिया और सरकार के अगले फैसले की राह देख रहे हैं.










