मैं पढ़-लिख नहीं पाया, इसलिए हमेशा चाहा कि मेरे बच्चे बड़े अफसर बनें. यह कहते हैं सन्नी कुमार वर्मा के पिता ब्रिजेश कुमार वर्मा, जिनके संघर्ष और जुनून ने आज उनके बेटे को स्टेट टॉपर बना दिया है. ब्रिजेश कुमार वर्मा कपड़े की दुकान में बिलिंग का काम करते हैं, लेकिन सिर्फ एक नौकरी से परिवार चलाना आसान नहीं था. बच्चों की बेहतर परवरिश और पढ़ाई के लिए उन्होंने एक साथ तीन-तीन काम किए. 10 सालों तक सुबह अखबार बांटा. वर्तमान में दिन में दुकान पर नौकरी करते हैं और रात में नाइट गार्ड बनकर ड्यूटी निभाते हैं. दूसरी ओर, मां संगीता देवी ने घर की जिम्मेदारियों के बीच कर्ज लेकर भी बच्चों की पढ़ाई जारी रखी.
सफलता से छलके खुशी के आंसू
संगीता देवी भावुक होकर कहती हैं कि कई बार स्कूल फीस देने तक के पैसे नहीं होते थे. एक कमरे में बच्चों को पढ़ाना भी मुश्किल था, लेकिन आज बेटे की सफलता ने हमारी सारी मेहनत सफल कर दी. खुशी के आंसू रुक नहीं रहे.
एक कमरे से उठकर बना टॉपर
इन्हीं संघर्षों के बीच न्यू मधुकम देवी मंडप रोड नंबर पांच स्थित किराए के एक कमरे में रहने वाले सन्नी ने पढ़ाई जारी रखी. उसी एक कमरे में चार सदस्यीय परिवार के बीच उन्होंने 99.60 प्रतिशत अंक लाकर न सिर्फ संत अलोइस स्कूल, रांची बल्कि पूरे राज्य में टॉप कर इतिहास रच दिया. रिजल्ट आते ही उनके घर बधाई देने वालों और मीडिया की भीड़ उमड़ पड़ी.
इंजीनियरिंग करना है सपना
सन्नी की सफलता का आधार उनका अनुशासन और फोकस रहा. वे बताते हैं कि उन्होंने शिक्षकों के मार्गदर्शन में बार-बार रिवीजन किया और खुद को सोशल मीडिया से दूर रखा. आज सोशल मीडिया का दौर है, लेकिन यह पढ़ाई से भटका भी सकता है. इसका इस्तेमाल सीमित करना चाहिए. अब सन्नी का लक्ष्य 12वीं के बाद जेइइ क्वालिफाई कर आइटी इंजीनियरिंग करना है.










