उत्पाद सिपाही पेपर लीक और सॉल्वर गैंग प्रकरण में गिरफ्तार 166 आरोपियों की कोर्ट में पेशी के दौरान एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिये. दरअसल जब कड़ी सुरक्षा के बीच बस से आरोपियों को कोर्ट ले जाया जा रहा था उस वक्त पुलिस का एक सरकारी चालक कथित तौर पर एक आरोपी से पैसे लिया और बदले में उसे मोबाइल से बात करने की अनुमति दी. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. हालांकि, इस वीडियो की आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस गतिविधि ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है.
मानवीय पहल या नियमों की अनदेखी?
मामले के तूल पकड़ने के बाद सिटी एसपी पारस राणा ने पुलिस का पक्ष रखते हुए इसे एक मानवीय घटना बताया. सिटी एसपी के अनुसार, वायरल वीडियो की आंतरिक जांच कराई गई है. जांच में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित पुलिसकर्मी (जो कोतवाली थाना का चालक बताया जा रहा है) और आरोपी एक ही गांव के रहने वाले हैं. आरोपी अपने पिता से संपर्क करने के लिए परेशान था, जिसके बाद पुलिसकर्मी ने सहानुभूति दिखाते हुए अपने मोबाइल से उसकी बात करवा दी. पुलिस का तर्क है कि यह किसी पेशेवर मिलीभगत के बजाय एक मानवीय मदद थी.
पैसे के लेन-देन पर पुलिस का स्पष्टीकरण
वीडियो में पैसे लेते दिखने के आरोप पर भी सिटी एसपी ने सफाई दी है. उन्होंने बताया कि आरोपी के पास चार हजार रुपये थे. आरोपी ने पुलिसकर्मी को ये पैसे यह सोचकर दिए कि जेल जाने के बाद ये उसके किसी काम नहीं आएंगे, इसलिए इन्हें उसके पिता तक पहुंचा दिया जाए. हालांकि, कानूनविदों का मानना है कि किसी भी परिस्थिति में विचाराधीन कैदी को बाहरी संपर्क के लिए निजी फोन देना नियमों के विरुद्ध है.
सुरक्षा व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल
भले ही पुलिस ने इस मामले में सफाई दे दी हो, लेकिन हाई-प्रोफाइल पेपर लीक मामले के आरोपियों के साथ ऐसी ‘नरमी’ ने विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है. कोर्ट परिसर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जहां सुरक्षा के कड़े प्रोटोकॉल होते हैं, वहां ऐसी लापरवाही किसी बड़ी साजिश को भी जन्म दे सकती थी. फिलहाल, पुलिस विभाग इस मामले में आगे की निगरानी की बात कह रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस ‘मानवीय पहल’ को लेकर बहस छिड़ी हुई है.










